गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए बदला नियम, अब एक लाइसेंस से पूरे देश में चलेगा कारोबार

देश में रेल के जरिए माल ढुलाई को आसान और किफायती बनाने के लिए भारतीय रेल ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब कंटेनर ट्रेन चलाने वाली निजी कंपनियों (ऑपरेटरों) को अलग-अलग रूट के लिए लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं…

रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए बदला नियम, अब एक लाइसेंस से पूरे देश में चलेगा कारोबार
(फोटो: IANS)

देश में रेल के जरिए माल ढुलाई को आसान और किफायती बनाने के लिए भारतीय रेल ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब कंटेनर ट्रेन चलाने वाली निजी कंपनियों (ऑपरेटरों) को अलग-अलग रूट के लिए लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी. समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए 'सिंगल ऑल-इंडिया लाइसेंस' की व्यवस्था लागू कर दी है. इसके तहत सिर्फ एक लाइसेंस लेकर ऑपरेटर पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर अपनी कंटेनर ट्रेनें चला सकेंगे.

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इस नई व्यवस्था का मकसद लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है. इससे न केवल ऑपरेटरों के लिए कारोबार करना आसान होगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आने की उम्मीद है, जिसका फायदा उद्योगों, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को मिल सकता है.

लाइसेंसिंग और शुल्क में बड़े बदलाव

रेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत इन संशोधनों के बाद, पहले से चली आ रही रूट-आधारित श्रेणी व्यवस्था खत्म हो जाएगी. पहले ऑपरेटरों को अलग-अलग रूट श्रेणियों के लिए अलग-अलग अनुमति और शुल्क देना पड़ता था. अब इसकी जगह कोई भी आवेदक 25 करोड़ रुपये का एकमुश्त पंजीकरण शुल्क जमा करके पूरे भारत में परिचालन का अधिकार पा सकेगा. यह शुल्क अप्रतिदेय (नॉन-रिफंडेबल) होगा.

लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद इसे 20 वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा. यह विस्तार ऑपरेटर के संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा और इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा.

पुराने ऑपरेटरों के लिए क्या हैं नियम?

जो कंपनियां पहले से अलग-अलग श्रेणियों में काम कर रही हैं, उनके लिए भी प्रावधान किए गए हैं:

  • कैटेगरी-फर्स्ट: इस श्रेणी के लाइसेंसधारी अपनी मौजूदा रियायत अवधि समाप्त होने तक काम जारी रख सकते हैं. नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस का नवीनीकरण कराते समय उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.
  • कैटेगरी-सेकेंड, थर्ड और फोर्थ: इन श्रेणियों के ऑपरेटर भी अपनी रियायत अवधि पूरी होने तक काम कर सकेंगे. हालांकि, जब वे नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस का नवीनीकरण कराएंगे, तो उन्हें 15 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा. यह राशि नए 25 करोड़ के शुल्क और उनके द्वारा पहले जमा किए गए 10 करोड़ रुपये के बीच का अंतर है. वे चाहें तो अपनी 20 साल की अवधि पूरी होने से पहले भी इस नई व्यवस्था में आ सकते हैं.

नई नीति के फायदे

माना जा रहा है कि इस कदम से कंटेनर ट्रेन परिचालन का विस्तार होगा और रेल आधारित माल ढुलाई को बढ़ावा मिलेगा. जब ज्यादा माल सड़क की बजाय रेल से जाएगा, तो इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़ कम होगी, ईंधन की खपत घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी. सरकार इन संशोधनों को जल्द ही राजपत्र अधिसूचना के जरिए अधिसूचित करेगी.

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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