भारत का DPI मॉडल बना वैश्विक डिजिटल कूटनीति का नया औजार, AI के साथ मिलकर दुनिया में बढ़ा रहा प्रभाव
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल अब देश की सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक पटल पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक स्तंभ के रूप में उभर रहा है। आधार, UPI और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्मों पर आधारि…
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल अब देश की सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक पटल पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक स्तंभ के रूप में उभर रहा है। आधार, UPI और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्मों पर आधारित यह ढांचा, जिसे 'इंडिया स्टैक' भी कहा जाता है, अब सिर्फ़ भारतीय नागरिकों को सेवाएं देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के देशों के लिए सहयोग का एक शक्तिशाली माध्यम बन गया है।
ईस्ट एशिया फोरम की एक नई रिपोर्ट के हवाले से समाचार एजेंसी IANS ने बताया है कि भारत अपनी डिजिटल तकनीक और प्लेटफॉर्म के ज़रिए खुद को डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट से पहले ही भारत 23 देशों के साथ DPI सहयोग के लिए समझौते कर चुका था, जो दुनिया भर में इस मॉडल के प्रति बढ़ती रुचि का स्पष्ट संकेत है।
क्या है भारत का DPI मॉडल?
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यानी 'इंडिया स्टैक', कई डिजिटल प्रणालियों का एक एकीकृत ढांचा है। इसमें डिजिटल पहचान (आधार), डिजिटल भुगतान (UPI), सरकारी सेवाओं की डिलीवरी और डेटा एक्सचेंज सिस्टम शामिल हैं। इस मॉडल की नींव आधार परियोजना के साथ रखी गई थी, जिसका शुरुआती लक्ष्य सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना था। समय के साथ यह एक विशाल डिजिटल इकोसिस्टम में विकसित हो गया, जिसने वित्तीय समावेशन से लेकर ई-गवर्नेंस तक कई क्षेत्रों में क्रांति ला दी।
कूटनीति और वैश्विक स्वीकृति
विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्लेटफॉर्मों की कामयाबी ने भारत की डिजिटल कूटनीति को नई ऊर्जा दी है। विशेषकर, 2023 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने DPI को वैश्विक एजेंडे का एक प्रमुख हिस्सा बनाया, जिसके बाद कई देशों ने इसे अपनाने में दिलचस्पी दिखाई। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत का मॉडल उन देशों के लिए एक आकर्षक समाधान है जो अपनी डिजिटल संप्रभुता को बनाए रखते हुए आधुनिक सिस्टम बनाना चाहते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबियों में इसकी स्केलेबिलिटी (बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता) और इंटरऑपरेबिलिटी (विभिन्न प्रणालियों के साथ काम करने की क्षमता) शामिल है।
AI के साथ भविष्य की राह
DPI और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता तालमेल भविष्य के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। नीति निर्माताओं का मानना है कि AI-आधारित एप्लिकेशन सार्वजनिक सेवाओं को और भी प्रभावी बना सकते हैं। भारत की AI रणनीति भी DPI के साथ AI के गहरे एकीकरण पर जोर देती है। इसमें 'भाषिणी' जैसे भाषा-आधारित प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जिनका मकसद अलग-अलग भारतीय भाषाओं में डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाना है।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
हालांकि भारत का DPI मॉडल वैश्विक स्तर पर सफल हो रहा है, लेकिन रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा गोपनीयता, डिजिटल गवर्नेंस और नियामकीय निगरानी जैसे मुद्दों पर लगातार ध्यान देना ज़रूरी होगा। जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ेगा, इन चिंताओं का महत्व और भी बढ़ जाएगा। विश्लेषकों के अनुसार, नागरिकों का भरोसा बनाए रखने के लिए डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भविष्य के विस्तार के लिए आवश्यक है।
इनपुट: IANS



