गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

भारतीय जॉब मार्केट का बदला मिजाज: AI स्किल्स की मांग बढ़ी, पर एंट्री-लेवल IT नौकरियों में आई कमी

भारत के जॉब मार्केट में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई टेक्नोलॉजी से जुड़े स्किल्स की मांग आसमान छू रही है, वहीं पारंपरिक एंट्री-लेवल आईटी…

भारतीय जॉब मार्केट का बदला मिजाज: AI स्किल्स की मांग बढ़ी, पर एंट्री-लेवल IT नौकरियों में आई कमी
(फोटो: IANS)

भारत के जॉब मार्केट में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई टेक्नोलॉजी से जुड़े स्किल्स की मांग आसमान छू रही है, वहीं पारंपरिक एंट्री-लेवल आईटी नौकरियों में गिरावट दर्ज की गई है। जॉब पोर्टल फाउंडइट की एक नई रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है, जिसमें भारतीय रोजगार बाजार के दो अलग-अलग रुझानों का विश्लेषण किया गया है।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्नोलॉजी से जुड़े सभी तरह के कामों (Tech Occupations) की कुल मांग में सालाना 10% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इसके विपरीत, सिर्फ आईटी इंडस्ट्री में नौकरियों का इंडेक्स 6% गिरा है। इसका सीधा मतलब यह है कि तकनीकी हुनर की जरूरत अब सिर्फ आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर जैसे दूसरे सेक्टरों में भी फैल रही है।

AI की भूमिका और फ्रेशर्स की भर्ती

रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी नौकरियों में आया तेज उछाल है। एक साल पहले तक एंट्री-लेवल भर्तियों में AI से जुड़े पदों की हिस्सेदारी सिर्फ 1% थी, जो अब बढ़कर 4% हो गई है। कंपनियाँ अब सिर्फ AI मॉडल बनाने वालों को ही नहीं, बल्कि उन पेशेवरों को भी ढूंढ रही हैं जो इन AI सिस्टम को चला सकें, उन्हें जाँच सकें और बेहतर बना सकें।

हालांकि, आईटी सेक्टर में फ्रेशर्स की कुल भर्ती में कमी आई है। पिछले साल कुल फ्रेशर हायरिंग में आईटी सेक्टर का योगदान 32% था, जो इस साल घटकर 24% रह गया है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक साल में एंट्री-लेवल आईटी नौकरियों में करीब 25% की कमी आई है।

अनुभवी पेशेवरों और दूसरे सेक्टरों की मांग

जहाँ एक ओर फ्रेशर्स की भर्ती में महीने-दर-महीने 2% और साल-दर-साल 10% की गिरावट आई है, वहीं 7 से 10 साल के अनुभव वाले पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है। यह अकेला ऐसा अनुभव वर्ग है, जिसमें मासिक आधार पर 2% और सालाना 11% की वृद्धि देखी गई।

फाउंडइट के सीईओ तरुण सिन्हा ने इस पर कहा, "जो कंपनियां आर्थिक सुस्ती के दौरान भी नए स्नातकों की भर्ती जारी रखती हैं, वे भविष्य की क्षमताओं में निवेश कर रही हैं। वे आने वाले वर्षों के नेतृत्व को तैयार कर रही हैं, बजाय इसके कि भविष्य में महंगे अनुभवी कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़े।"

किन सेक्टरों में बढ़ी फ्रेशर्स की मांग?

रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेशर्स की भर्ती अब दूसरे क्षेत्रों में बढ़ रही है। सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट में फ्रेशर्स की हिस्सेदारी 18% से बढ़कर 20% हो गई है। इसी तरह, इंजीनियरिंग और उत्पादन क्षेत्र में यह 6% से बढ़कर 8% तक पहुंच गई। सबसे बड़ी छलांग मेडिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में दिखी, जहां यह हिस्सेदारी 7% से बढ़कर 11% हो गई। इसके बावजूद, STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) पृष्ठभूमि वाले स्नातक अभी भी मजबूत स्थिति में हैं, जिनकी कुल फ्रेशर भर्ती में 42% हिस्सेदारी है।

इनपुट: IANS

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