AI का सुपरपावर बनना है तो चिप नहीं, असली समस्याओं के समाधान पर ध्यान दे भारत: नंदन नीलेकणी
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी का मानना है कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नेतृत्व करने के लिए एडवांस चिप या लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) बनाने की होड़ में शामिल होने की…
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी का मानना है कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नेतृत्व करने के लिए एडवांस चिप या लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) बनाने की होड़ में शामिल होने की ज़रूरत नहीं है। इसके बजाय, असली मौका कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल से जुड़े ऐप्लिकेशन बनाने में है।
गुरुवार को एनसीएईआर इंडिया पॉलिसी फोरम 2026 में बोलते हुए उन्होंने यह बात कही। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नीलेकणी ने कहा कि भारत के पास दुनिया की "एआई यूज-केस कैपिटल" यानी AI के व्यावहारिक उपयोग की राजधानी बनने का एक शानदार अवसर है। उन्होंने समझाया, "पश्चिमी देश AI के इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे एलएलएम, अधिक चिप और डेटा सेंटर्स पर फोकस कर रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में इन्फ्रास्ट्रक्चर आम चीज बन जाएगी। वैल्यू एप्लीकेशन लेयर की तरफ चली जाती है, और भारत के पास दुनिया की एआई यूज-केस राजधानी बनने का मौका है।"
डीपीआई की सफलता से AI को रास्ता
नीलेकणी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि यह AI को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए एक बेहतरीन मॉडल है। डीपीआई ने यह साबित किया है कि तकनीक का लाभ सिर्फ़ कारोबारियों तक ही नहीं, बल्कि एक अरब से ज़्यादा आम लोगों तक भी पहुँचाया जा सकता है।
स्टार्टअप बनेंगे रोजगार का सबसे बड़ा ज़रिया
आर्थिक विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगले दशक में भारत में रोजगार सृजन का नेतृत्व बड़ी कंपनियाँ नहीं, बल्कि उद्यमी और स्टार्टअप करेंगे। उन्होंने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एक दशक पहले देश में 10,000 से भी कम स्टार्टअप थे, जो आज 1,50,000 से ज़्यादा हो गए हैं। नीलेकणी ने अनुमान लगाया कि अगर यह इकोसिस्टम 20% की सालाना दर से भी बढ़ता रहा, तो 2035 तक देश में दस लाख से ज़्यादा स्टार्टअप हो सकते हैं। उनके मुताबिक, ये स्टार्टअप न केवल उद्यमी पैदा करेंगे, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियाँ भी देंगे।
अंत में उन्होंने ज़ोर दिया कि भारत को अपनी विशाल कामकाजी आबादी (डेमोग्राफिक डिविडेंड) का लाभ उठाने के लिए तेज़ आर्थिक विकास दर बनाए रखनी होगी। साथ ही, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन के जोखिम, स्वास्थ्य, शिक्षा और उत्पादकता जैसी चुनौतियों से भी निपटना होगा।
इनपुट: IANS



