केरल पुलिस में बड़ा बदलाव: 419 थानों की कमान सब-इंस्पेक्टरों को, 'माई पुलिस स्टेशन' पहल भी शुरू
केरल में पुलिस व्यवस्था को और अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से एक बड़े सुधार की घोषणा की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को राज्य सरकार ने 'माई पुलिस स्टेशन' नामक एक नई…
केरल में पुलिस व्यवस्था को और अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से एक बड़े सुधार की घोषणा की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को राज्य सरकार ने 'माई पुलिस स्टेशन' नामक एक नई पहल शुरू करने का ऐलान किया, जो स्वतंत्रता दिवस से लागू होगी। इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य पुलिस स्टेशनों को आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाना और लोकतांत्रिक पुलिसिंग के एक नए युग की शुरुआत करना है।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इन सुधारों को एक 'ऐतिहासिक बदलाव' बताया है। इस पहल के तहत पुलिस स्टेशनों के कामकाज में व्यापक परिवर्तन किए जाएँगे, जिसमें स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) की तैनाती की पुरानी व्यवस्था को बदलना भी शामिल है।
सब-इंस्पेक्टरों को मिलेगी बड़ी ज़िम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत, केरल के 484 कानून-व्यवस्था पुलिस स्टेशनों में से 419 में स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) का पद सब-इंस्पेक्टरों को सौंपा जाएगा। यह पिछली सरकार के उस फैसले को पलट देगा, जिसमें यह ज़िम्मेदारी सर्कल इंस्पेक्टरों को दी गई थी। अब सर्कल इंस्पेक्टर केवल 64 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलिस स्टेशनों के प्रभारी बने रहेंगे। वहीं, मुल्लापेरियार पुलिस स्टेशन अपनी सामरिक अहमियत के कारण डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा।
महिला नेतृत्व और निगरानी पर ज़ोर
पुलिसिंग में महिलाओं की भूमिका को बढ़ावा देते हुए, पहली बार 63 पुलिस स्टेशनों की कमान महिला सब-इंस्पेक्टरों को दी जाएगी। इसके अलावा, एक नया निगरानी ढाँचा भी तैयार किया जा रहा है। इसके तहत 200 पुलिस सर्कल बनाए जाएँगे, जहाँ सर्कल इंस्पेक्टर नए नियुक्त किए गए एसएचओ के काम की निगरानी और मार्गदर्शन करेंगे।
हिरासत में अपराधों पर 'ज़ीरो टॉलरेंस'
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नए पुलिसिंग मॉडल का एक अहम मकसद हिरासत में होने वाले अपराधों, जैसे कि मौत या टॉर्चर, को पूरी तरह से समाप्त करना है। सरकार ने 'थर्ड-डिग्री' जैसे तरीकों को अलोकतांत्रिक, अमानवीय और अस्वीकार्य बताया है। इन बदलावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी नए एसएचओ, पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों और सुपरवाइज़री अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रशिक्षण में लोगों से व्यवहार, नेतृत्व क्षमता, साइबर अपराध और तकनीक-आधारित पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पारदर्शिता और सामुदायिक जुड़ाव
इस सुधार कार्यक्रम में एक स्वतंत्र फीडबैक तंत्र भी शामिल है। रेंज के डीआईजी हर महीने पुलिस स्टेशन से जनता की प्रतिक्रिया एकत्र कर उसकी समीक्षा करेंगे। साथ ही, दो दशक पुराने 'जनमैत्री सुरक्षा प्रोजेक्ट' को भी फिर से शुरू करने की योजना है, ताकि सामुदायिक पुलिसिंग को मज़बूत किया जा सके। एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) राज्य पुलिस प्रमुख की देखरेख में इस पूरे प्रोजेक्ट का समन्वय करेंगे और सरकार को मासिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे। माना जा रहा है कि अगर यह पहल सही ढंग से लागू हुई, तो यह केरल पुलिस में एक बड़ा संरचनात्मक और सांस्कृतिक बदलाव ला सकती है।
इनपुट: IANS



