गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: हड़ताली डॉक्टरों को बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी, 'काम पर लौटें, वरना वेतन रुकेगा'

महाराष्ट्र में होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाजत देने के खिलाफ हड़ताल पर उतरे डॉक्टरों को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए डॉक्टरों…

महाराष्ट्र: हड़ताली डॉक्टरों को बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी, 'काम पर लौटें, वरना वेतन रुकेगा'
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाजत देने के खिलाफ हड़ताल पर उतरे डॉक्टरों को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर उनका वेतन रोकने का आदेश दिया जा सकता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने हड़ताली डॉक्टरों से एक तीखा सवाल भी पूछा, "अगर हड़ताल के दौरान म्युनिसिपल अस्पतालों में एक भी मरीज की मौत होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।"

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यह पूरा विवाद राज्य सरकार के उस फैसले से जुड़ा है, जिसके तहत होम्योपैथी डॉक्टरों को एक ब्रिज कोर्स के जरिए एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति दी गई है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एसएआरडी) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) इस निर्णय का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान अदालत ने डॉक्टरों के विरोध के तरीके पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा, "मान लीजिए कि बाद में आपकी याचिका मंजूर हो जाती है और आप जीत जाते हैं, लेकिन आपकी हड़ताल के दौरान 50 मरीजों की मौत हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?" अदालत ने सभी डॉक्टरों को लंच ब्रेक के बाद काम पर लौटने का निर्देश देते हुए यह भरोसा भी दिया कि वह प्रदर्शनकारियों की पूरी बात सुनेगा।

आईएमए के वकीलों ने अदालत को बताया कि होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक अधिकार देने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पिछले 12 सालों से लंबित है। उन्होंने 3 अगस्त के एक सरकारी आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने एक कमेटी बनाई है, लेकिन कमेटी का काम पूरा होने से पहले ही रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया गया है।

क्यों हो रहा है विरोध?

हड़ताल कर रहे डॉक्टरों का तर्क है कि सिर्फ 90 दिन का कोर्स कराकर होम्योपैथी डॉक्टरों को एमबीबीएस और एमडी डॉक्टरों के बराबर नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि यह फैसला मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। इसी विरोध के तहत मुंबई के आजाद मैदान में बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टरों और आईएमए के पदाधिकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर 'नो सीसीएमपी' (मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स) के नारे लगाए और सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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