चेन्नई: व्यासार्पडी नहर में जलकुंभी और कचरे का जाम, शास्त्री नगर में बाढ़ का खतरा मंडराया
चेन्नई के व्यासार्पडी इलाके में शास्त्री नगर के निवासी लगातार हो रही बारिश के बीच बाढ़ की आशंका से जूझ रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यहाँ की मुख्य नहर जलकुंभी और कचरे से इस कदर भर गई है कि…
चेन्नई के व्यासार्पडी इलाके में शास्त्री नगर के निवासी लगातार हो रही बारिश के बीच बाढ़ की आशंका से जूझ रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यहाँ की मुख्य नहर जलकुंभी और कचरे से इस कदर भर गई है कि पानी का बहाव लगभग रुक गया है, जिससे भारी बारिश होने पर पानी रिहायशी इलाकों में घुसने का डर पैदा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नहर की सतह पूरी तरह से जलीय पौधों से ढकी हुई है और यह किसी हरे कालीन की तरह दिखती है। इसके नीचे जमा गंदा पानी भीषण दुर्गंध फैला रहा है और मच्छरों-कीड़ों के पनपने का केंद्र बन गया है। निवासियों के मुताबिक, यह समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है और अब बारिश ने इसे और गंभीर बना दिया है।
पुल निर्माण और कचरे ने बढ़ाई मुसीबत
इस समस्या को शास्त्री नगर के अन्ना सलाई पर बन रहे एक पुल ने और बढ़ा दिया है। निर्माण कार्य के चलते नहर के कुछ हिस्से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे जल निकासी और धीमी हो गई है। नतीजतन, फर्स्ट स्ट्रीट और आस-पास के घरों में बारिश का पानी जमा होने लगा है। लोगों ने यह भी शिकायत की है कि रात के समय नहर में अवैध रूप से कूड़ा फेंका जा रहा है, जो जलमार्ग को और भी चोक कर रहा है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, "पिछले पांच महीनों से यहां जलकुंभी उग रही है। कुछ लोग रात में नहर के किनारे कचरा भी फेंक देते हैं। इससे पानी का बहाव और बाधित होता है। दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप रोज़ाना की परेशानी है।" एक अन्य निवासी नागमणि ने बताया कि पुल निर्माण के कारण जल प्रवाह रुकने से रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। उन्होंने जल्द काम पूरा करने या अस्थायी जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है।
नगर निगम का क्या कहना है?
लोगों ने ग्रेटर चेन्नई नगर निगम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि भारी मानसून की बारिश से पहले नहर को साफ किया जा सके। निवासियों ने चेतावनी दी है कि देरी होने पर बाढ़ के साथ-साथ मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।
इस मामले पर नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्ना सलाई पर पुल का एक हिस्सा पूरा हो चुका है और दूसरे पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि नहर से घनी वनस्पति हटाने के लिए एक रोबोटिक उत्खनन यंत्र (excavator) की मांग की गई है। अधिकारी के अनुसार, उपकरण के आते ही जलकुंभी हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोग मानसून के जोर पकड़ने से पहले तत्काल कार्रवाई चाहते हैं।
इनपुट: IANS



