शराब की अधिक मात्रा वाली दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, अब बिक्री के लिए डॉक्टर का पर्चा और लाइसेंस ज़रूरी
केंद्र सरकार ने उन दवाओं की बिक्री पर नए नियम लागू कर दिए हैं जिनमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होती है। अब ऐसे उत्पादों को बेचने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होगी और इन्हें सिर्फ़ डॉक्टर के पर्चे पर ही खरी
केंद्र सरकार ने उन दवाओं की बिक्री पर नए नियम लागू कर दिए हैं जिनमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होती है। अब ऐसे उत्पादों को बेचने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होगी और इन्हें सिर्फ़ डॉक्टर के पर्चे पर ही खरीदा जा सकेगा। सरकार का यह कदम इन दवाओं के नशे के तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह नियम उन औषधीय तैयारियों पर लागू होगा जिनमें 12 प्रतिशत से ज़्यादा एथिल अल्कोहल (इथेनॉल) है और जो 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग में बेची जाती हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक गजट अधिसूचना के माध्यम से इन संशोधनों को अधिसूचित किया गया।
क्यों पड़ी इस बदलाव की ज़रूरत?
पहले इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित अर्क (टिंचर) जैसी कई दवाओं को लाइसेंस की शर्तों से छूट मिली हुई थी। हालांकि, इनमें से कुछ उत्पादों में एथिल अल्कोहल की मात्रा 80 से 90 प्रतिशत तक पाई गई, जिसके कारण इनके नशे के लिए दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई थी। केंद्र सरकार ने बताया कि कुछ राज्य सरकारों ने भी इस दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए सुझाव भेजे थे।
क्या हैं नए नियम?
नए नियमों के तहत, इन दवाओं को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के दायरे में लाया गया है। इसका मतलब है कि निर्माताओं और विक्रेताओं को अब इन्हें बनाने और बेचने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, इन औषधीय तैयारियों को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-एच1 में भी शामिल कर दिया गया है।
अनुसूची-एच1 में शामिल होने का अर्थ है कि ये दवाएं अब केवल एक पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे पर ही मिलेंगी। साथ ही, इनकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि ये उत्पाद सिर्फ़ विनियमित दवा वितरण प्रणाली के माध्यम से ही उपलब्ध हों, जिससे इनके गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी और वास्तविक मरीजों को इनकी उपलब्धता भी बनी रहेगी।
इनपुट: IANS



