'रोबोफॉरेक्स' के नाम पर 2.30 करोड़ की ठगी, गुजरात पुलिस ने साइबर गिरोह के 5 सदस्य दबोचे
एक फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग स्कीम में 2.30 करोड़ रुपए गँवाने वाली महिला की शिकायत ने गुजरात में एक बड़े साइबर नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। इस मामले में गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 'ऑपरेश
एक फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग स्कीम में 2.30 करोड़ रुपए गँवाने वाली महिला की शिकायत ने गुजरात में एक बड़े साइबर नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। इस मामले में गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मैट्रिमोनियल साइट से शुरू हुई ठगी की पटकथा
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, धोखाधड़ी की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित से पहले एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट और फिर 'दिलसफर' ऐप के ज़रिए 'जिज्ञासा कपूर' नाम के व्यक्ति ने संपर्क साधा। आरोप है कि इस शख्स ने पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि 'रोबोफॉरेक्स' प्लेटफॉर्म पर फॉरेक्स ट्रेडिंग टिप्स के ज़रिए मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार, शुरुआत में पीड़ित को 'रोबोफॉरेक्स' वेबपेज पर अकाउंट खुलवाकर 50,000 रुपए निवेश करने को कहा गया। भरोसा जीतने के लिए पहले निवेश पर मुनाफा निकालने की भी अनुमति दी गई। इसके बाद टेलीग्राम के ज़रिए शिकायतकर्ता को अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा गया, जिस पर उन्होंने 1.47 करोड़ रुपए भेज दिए।
अकाउंट 'लॉक' कर और पैसे ऐंठे
ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भारी मुनाफा दिखाने के बाद अचानक पीड़ित को संदेश मिला कि उनका रोबोफॉरेक्स अकाउंट लॉक कर दिया गया है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने अकाउंट अनलॉक कराने के लिए अतिरिक्त 83 लाख रुपए माँगे और बाद में पैसे निकालने के शुल्क के बहाने और भुगतान की माँग की। इस तरह अलग-अलग बहानों से पीड़ित से कुल 2.30 करोड़ रुपए ठग लिए गए — जो कभी वापस नहीं मिले। पुलिस का कहना है, "सभी आरोपियों ने शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश में मिलकर काम किया।"
नेपाल तक फैला था नेटवर्क, 31 मामलों से जुड़ा एक बैंक खाता
जाँच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार आरोपी राज पडसाला ने अपनी फर्म 'आरपी केमिकल्स' के नाम पर खुलवाए बैंक खाते की बैंकिंग किट कमीशन के बदले सह-आरोपी याज्ञनिक रमानी को सौंपी थी। अधिकारियों के अनुसार, "रमानी ने यह किट सह-आरोपी डॉ. जयदीप कुमार अर्देशना — जिन्हें 'डॉक्टर उपलेटा' के नाम से जाना जाता है और जो उपलेटा में क्लिनिक चलाते हैं — को दी। उनके ज़रिए नेटवर्क ने लक्ष्मण वाघेला से संपर्क किया, जिन्होंने दिल्ली में राहुल नाम के व्यक्ति तक पहुँचने के लिए पंकज पासवान का इस्तेमाल किया।"
पुलिस का आरोप है कि सरफराज नाम के एक अन्य व्यक्ति के ज़रिए बैंकिंग किट को अंततः नेपाल भेजा गया, जहाँ साइबर ठगी से कमाई रकम को इधर-उधर करने और ठिकाने लगाने के लिए इसका उपयोग किया गया। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर 'आरपी केमिकल्स' के बैंक खाते की जाँच में यह सामने आया कि यह खाता देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 31 शिकायतों से जुड़ा था, जिनमें कुल 15.31 करोड़ रुपए से अधिक की रकम शामिल है।
पाँच गिरफ्तार, सात मोबाइल व फर्जी दस्तावेज़ जब्त
ऑपरेशन के दौरान सात मोबाइल फोन और दो फर्जी पहचान दस्तावेज़ — एक आधार कार्ड और एक पैन कार्ड — जब्त किए गए। गिरफ्तार पाँचों आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है: आनंद के राज पडसाला (बैंक खाताधारक), याज्ञनिक रमानी (राजकोट, बैंक खाता सप्लायर), लक्ष्मण वाघेला (राजकोट, बैंक खाता सप्लायर), डॉ. जयदीप कुमार अर्देशना (राजकोट, बैंक खाता सप्लायर) और सागर गोकानी (राजकोट, बैंक खाता प्रोवाइडर)। पुलिस ने बताया कि इस मामले में आगे की जाँच जारी है।
इनपुट: IANS



