गुजरात: स्कूल छोड़ चुके 80 हजार बच्चों को वापस लाने की तैयारी, CM पटेल ने 'समरस विद्या सेतु' अभियान शुरू किया
गुजरात में स्कूल छोड़ चुके 80,000 से अधिक बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री…
गुजरात में स्कूल छोड़ चुके 80,000 से अधिक बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को अहमदाबाद से 'समरस विद्या सेतु' नामक इस राज्यव्यापी कैंपेन का शुभारंभ किया। इस पहल का लक्ष्य राज्य में 'ज़ीरो ड्रॉपआउट' के लक्ष्य को हासिल करना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी नेतृत्व में राज्य का स्कूल ड्रॉपआउट रेट घटकर सिर्फ दो प्रतिशत रह गया है। अब इस अभियान के तहत बाकी बच्चों को भी वापस लाने की योजना है। इसके लिए एक व्यवस्थित प्रणाली बनाई गई है, जिसमें स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की जिलेवार सूची तैयार की गई है।
कैसे काम करेगा यह अभियान?
इस योजना के तहत शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर बच्चों के माता-पिता से संपर्क साधेंगे। हर बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार कक्षा 1 से 12 तक में दाखिला दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार, जो बच्चे पढ़ाई में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष देखभाल और अतिरिक्त शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है ताकि वे बाकी छात्रों के साथ आ सकें।
शिक्षा और रोजगार का सीधा संबंध
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गुजरात आज व्यापार और रोजगार के लिए देश की पहली पसंद बन चुका है। उन्होंने कहा, “वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में राज्य के युवाओं को रोजगार का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए उच्च शिक्षा आवश्यक है।” उन्होंने अभिभावकों से भी अपने बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की और कहा कि यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सबके सहयोग से ही संभव होगी।
पटेल ने सरकारी और नगर निगम के स्कूलों में शिक्षा के स्तर में हो रहे सुधार की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि बेहतर पढ़ाई के कारण अब कई छात्र प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। उन्होंने इस काम के लिए शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को बधाई दी। शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाज ने इस अभियान को एक जन-आंदोलन बताया, जो शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करेगा।
इनपुट: IANS



