गुजरात: सवा करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, कमीशन के लालच में बैंक खाते बेचने वाले 3 गिरफ्तार
गुजरात में साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें तीन लोगों को कमीशन के बदले अपने बैंक खातों को अपराधियों को सौंपने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…
गुजरात में साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें तीन लोगों को कमीशन के बदले अपने बैंक खातों को अपराधियों को सौंपने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन बैंक खातों का इस्तेमाल गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान के लोगों से 1.24 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धोखाधड़ी करने के लिए किया गया था। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) ने यह कार्रवाई वलसाड के उडवाड़ा में एक गुप्त सूचना के आधार पर की।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान भावेश पटेल, दीपेशकुमार पटेल और अभयकुमार नायक के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, ये लोग एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थे, जिसका मकसद साइबर फ्रॉड से कमाए गए अवैध धन को एक खाते से दूसरे खाते में घुमाना था।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच में पता चला है कि आरोपी मामूली आर्थिक फायदे के लिए अपने नाम पर बचत खाते (Savings Accounts) खुलवाते थे। इसके बाद वे खाते की पूरी जानकारी और बैंकिंग किट (जैसे- डेबिट कार्ड, चेकबुक) अपने उन साथियों को दे देते थे, जो सीधे तौर पर ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसे अपराधों में शामिल थे। इन खातों को 'म्यूल अकाउंट' के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था, ताकि धोखाधड़ी से हासिल रकम को आसानी से ट्रांसफर किया जा सके और मुख्य अपराधियों तक पुलिस की पहुँच मुश्किल हो जाए।
पुलिस ने जब इन बैंक खातों की नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर जाँच की, तो साइबर धोखाधड़ी की तीन शिकायतें मिलीं। इनमें गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान से एक-एक शिकायत शामिल थी, जिनमें कुल मिलाकर 1,24,79,156 रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई।
किस आरोपी की क्या थी भूमिका?
पुलिस ने बताया कि भावेश पटेल ने अपने नाम पर एक बचत खाता खुलवाया और उसकी किट अपने साथियों को सौंप दी। दीपेशकुमार पटेल ने इस तरह के खाते खुलवाने में मदद की, जबकि अभयकुमार नायक का काम इन बैंकिंग किट को इकट्ठा करके आगे इस्तेमाल के लिए भेजना था। आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी तरह के कमीशन या लालच में आकर अपने बैंक खाते की जानकारी किसी और को न दें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि खाते में हुए किसी भी अवैध लेनदेन के लिए खाताधारक को ही कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। साथ ही, साइबर अपराध के शिकार लोगों से हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या नजदीकी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।
इनपुट: IANS



