गुजरात में शहरी विकास: बजट में 45 गुना की विशाल वृद्धि, पिछले 5 वर्षों में 92,000 करोड़ खर्च
गुजरात में शहरी विकास के लिए आवंटित बजट में पिछले दो दशकों में 45 गुना से भी ज़्यादा की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने बीते पांच सालों में शहरों के ढाँचागत विकास और नागरिक सुविधाओं पर…
गुजरात में शहरी विकास के लिए आवंटित बजट में पिछले दो दशकों में 45 गुना से भी ज़्यादा की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने बीते पांच सालों में शहरों के ढाँचागत विकास और नागरिक सुविधाओं पर 92,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि ख़र्च की है।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, राज्य के प्रवक्ता और मंत्री जीतू वाघाणी ने मंगलवार को गांधीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में शहरी आबादी के कल्याण और विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
मंत्री जीतू वाघाणी ने आँकड़ों के साथ बताया कि साल 2005-06 में राज्य का शहरी विकास बजट महज़ 660 करोड़ रुपए था, जो अब 2025-26 के लिए बढ़कर 30,325 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने इस वृद्धि को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा कि यह पिछले साल के आवंटन की तुलना में 40 प्रतिशत से भी ज़्यादा है।
विकास की नींव और भविष्य की दिशा
वाघाणी ने याद दिलाया कि गुजरात के शहरी विकास कार्यक्रम की नींव 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना' के साथ रखी थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गुजरात के शहरों को बुनियादी और ढाँचागत सुविधाएँ उपलब्ध कराना था। उन्होंने कहा कि सरकार अब स्थापित शहरी क्षेत्रों के अलावा नई सोसायटियों और बाहरी इलाकों (आउटग्रोथ क्षेत्रों) तक भी स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने पर विशेष ध्यान दे रही है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए गुजरात अग्रणी भूमिका निभाएगा और धन की कमी के कारण कोई भी विकास कार्य नहीं रुकेगा।
इनपुट: IANS



