पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर सरकार का आश्वासन, कहा - ज़रूरी कदम उठाते रहेंगे
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल के दाम काबू में रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल के दाम काबू में रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने कहा है कि उपभोक्ताओं को वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बढ़ते बोझ से बचाने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक उपाय आगे भी जारी रहेंगे।
यह आश्वासन पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में आई हालिया तेजी के बाद आया है। राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
उत्पाद शुल्क में कटौती और राजस्व पर असर
मंत्री ने याद दिलाया कि इस साल सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों के असर को कम करना था।
पंकज चौधरी के मुताबिक, इस कटौती के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी खजाने को लगभग 1.23 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमानित नुकसान होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस कदम से आम लोगों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs), दोनों को बढ़ती लागत के दबाव से बड़ी राहत मिली है।
आर्थिक संतुलन और भविष्य की रणनीति
सरकार का कहना है कि उत्पाद शुल्क में कमी से तेल कंपनियों को घाटे की स्थिति को संतुलित करने में मदद मिली, जिससे वे देश भर में ईंधन की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रख सकीं। चौधरी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ईंधन की कीमतों में अस्थिरता को कम करने के लिए जरूरत के हिसाब से कदम उठाए जाएंगे, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इससे देश की वित्तीय स्थिति पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
सरकार की रणनीति राजस्व और खर्च के रुझानों की निगरानी करते हुए आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय फैसले लेने की है, ताकि राजकोषीय अनुशासन बना रहे।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहु-आयामी प्रयास
दीर्घकालिक समाधान के लिए सरकार ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर भी काम कर रही है। इसके तहत कच्चे तेल के आयात के लिए नए स्रोत खोजना, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार करना, वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, और ऊर्जा दक्षता में सुधार जैसे कई कदम शामिल हैं।
इसी रणनीति के हिस्से के रूप में, जुलाई में भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई, जो उस महीने देश के कुल तेल आयात का 50 प्रतिशत से अधिक था। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधाओं को देखते हुए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण है।
इनपुट: IANS



