मंगलवार, 4 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन: ग्वालियर में ₹5,500 करोड़ के निवेश से 18,000 नौकरियों की उम्मीद

भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) के लिए निवेशकों से अब तक कुल 5,500 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धता हासिल हो चुकी है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थापित होने वाली इस परियोजना से…

भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन: ग्वालियर में ₹5,500 करोड़ के निवेश से 18,000 नौकरियों की उम्मीद
(फोटो: IANS)

भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) के लिए निवेशकों से अब तक कुल 5,500 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धता हासिल हो चुकी है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थापित होने वाली इस परियोजना से 18,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह आंकड़ा मुंबई में आयोजित दूसरे निवेशक सम्मेलन के बाद सामने आया है।

विज्ञापन

मंगलवार को मुंबई में हुए इस सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। इस आयोजन में दूरसंचार क्षेत्र की लगभग 18 प्रमुख कंपनियों ने हिस्सा लिया और 2,000 करोड़ रुपये के नए निवेश का वादा किया, जिससे करीब 4,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे पहले पिछले सप्ताह नई दिल्ली में हुए पहले निवेशक गोलमेज सम्मेलन में 3,500 करोड़ रुपये के निवेश और 14,000 नौकरियों की घोषणा की गई थी।

“मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड”

सम्मेलन में निवेशकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र में हुए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत अब केवल दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर दूरसंचार उत्पादों के निर्माण में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

सिंधिया ने "मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड" और "लोकल फॉर ग्लोबल" के विजन को दोहराते हुए कहा कि भारत को अब सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से उत्पाद-आधारित अर्थव्यवस्था बनना होगा। इसके लिए उन्होंने तीन रणनीतियां बताईं— देश में मूल्य संवर्धन बढ़ाना, भारत में बौद्धिक संपदा का सृजन करना और भारत में डिजाइन व निर्मित उत्पादों को दुनिया तक पहुंचाना।

ग्वालियर ही क्यों?

केंद्रीय मंत्री ने ग्वालियर को इस परियोजना के लिए एक आदर्श स्थान बताया। उन्होंने इसके पीछे ग्वालियर की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, विकसित औद्योगिक वातावरण, तैयार बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत जैसे कारणों का हवाला दिया। उन्होंने यह भी बताया कि आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने के बाद दिल्ली-एनसीआर से ग्वालियर की यात्रा तीन घंटे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा।

एक ही जगह सब कुछ

सिंधिया ने बताया कि यह दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र देश की अपनी तरह की पहली पहल है, जो पूरी तरह से टेलीकॉम उद्योग को समर्पित होगी। यहां एक ही परिसर में डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (R&D), टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरिंग, कलपुर्जे, सेमीकंडक्टर, ऑप्टिकल फाइबर और दूरसंचार उपकरणों सहित पूरी वैल्यू-चेन विकसित की जाएगी। इसके अलावा, निवेशकों को विश्व स्तरीय प्लग-एंड-प्ले परीक्षण सुविधाएं भी मिलेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर का यह ज़ोन वैश्विक सफलता का एक नया उदाहरण बनेगा।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →