गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ऑटोमोबाइल PLI स्कीम: ₹44,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश, 67,000 नई नौकरियां

केंद्र सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई जान फूंक रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 44,326 करोड़ रुपए का निवेश आ चुका है और…

ऑटोमोबाइल PLI स्कीम: ₹44,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश, 67,000 नई नौकरियां
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई जान फूंक रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 44,326 करोड़ रुपए का निवेश आ चुका है और 67,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। भारी उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह स्कीम भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल हब बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।

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इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (AAT) के निर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता घटाना है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 को आधार वर्ष मानते हुए ऑटो सेक्टर में 52,414 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिक्री भी दर्ज की गई है। सरकार ने पात्र कंपनियों को अब तक 2,386.36 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित भी कर दी है।

घरेलू उत्पादन पर जोर

पीएलआई-ऑटो स्कीम का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को एक अहम शर्त पूरी करनी होती है। उन्हें अपने उत्पादों में कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition - DVA) सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इस नियम का मकसद स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और देश की सप्लाई चेन को मजबूत करना है। 28 जुलाई 2026 तक की अवधि के लिए सरकार ने 18 कंपनियों को 155 एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी उत्पादों और उनके विभिन्न संस्करणों के लिए DVA प्रमाणपत्र जारी भी कर दिए हैं।

फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल पर सरकार का रुख

मंत्रालय ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। फिलहाल, 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहनों के लिए कोई अलग राष्ट्रीय नीति नहीं बनाई गई है। सरकार ने यह भी बताया कि उसने फ्लेक्स-फ्यूल या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रभावों पर कोई अलग से अध्ययन नहीं कराया है।

हालांकि, सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लेकर प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत गन्ने, मक्का, क्षतिग्रस्त या अतिरिक्त अनाज जैसे कई स्रोतों से एथेनॉल बनाने की अनुमति है। सरकार का कहना है कि जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है।

इनपुट: IANS

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