विदेशी निवेश से लेकर हीरा कारोबार तक, नए टैक्स कानून से सरकार क्या बदलना चाहती है?
केंद्र सरकार ने एक नए विधेयक के ज़रिए भारत की टैक्स व्यवस्था में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जिसका सीधा असर विदेशी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और हीरा कारोबार जैसे अहम क्षेत्रों पर पड़ेगा…
केंद्र सरकार ने एक नए विधेयक के ज़रिए भारत की टैक्स व्यवस्था में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जिसका सीधा असर विदेशी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और हीरा कारोबार जैसे अहम क्षेत्रों पर पड़ेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किया गया 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026' देश में कारोबार करने के माहौल को आसान बनाने और निवेशकों का भरोसा जीतने पर केंद्रित है। इसका मुख्य लक्ष्य एक स्पष्ट और स्थिर कर प्रणाली स्थापित करना है।
अक्सर विदेशी कंपनियों को यह डर रहता है कि भारत में कारोबार करने पर उन्हें अप्रत्याशित टैक्स देनदारियों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार इसी चिंता को दूर करने के लिए टैक्स नियमों को सरल बना रही है, ताकि अनुपालन का बोझ कम हो और भारत निवेश के लिए एक आकर्षक केंद्र बन सके।
निवेशकों और फंड मैनेजरों के लिए बड़े बदलाव
इस विधेयक का एक बड़ा फोकस विदेशी निवेश फंड्स (FDI) और उनके मैनेजरों को भारत में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत, फंड मैनेजरों के लिए पात्रता की शर्तों को आसान बनाने का प्रस्ताव है, जिससे वे भारत में आकर आसानी से काम कर सकेंगे। वहीं, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) में निवेश करने वालों को टैक्स छूट फिर से दी जाएगी, जिससे इन दोनों क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट
यह विधेयक भारत को मोबाइल फोन, लैपटॉप और सर्वर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का वैश्विक हब बनाने की दिशा में भी अहम कदम है। इसके तहत, अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में अपने उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री को मशीनरी या टूलिंग देती है, तो उससे होने वाली आय पर टैक्स छूट की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भी एक बड़ा प्रावधान किया गया है। जो विदेशी कंपनियाँ भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को कल-पुर्जे सप्लाई करने के लिए उन्हें भारतीय बॉन्डेड वेयरहाउस में रखती हैं, उन्हें इस कारोबार से होने वाली आय पर अब 15 वर्षों के लिए पूरी टैक्स छूट मिलेगी।
डेटा सेंटर और हीरा कारोबार पर भी नजर
सरकार चाहती है कि देश में बड़े पैमाने पर AI डेटा सिटी विकसित हों। इसके लिए विदेशी क्लाउड कंपनियों को आकर्षित करने हेतु डेटा सेंटर से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जा रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय हीरा कारोबार को भारत की ओर खींचने के लिए भी एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब तक विदेशी खनन कंपनियाँ मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में सिर्फ कच्चे हीरे प्रदर्शित कर सकती थीं। नए प्रस्ताव के तहत, इन क्षेत्रों में कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर उन्हें 15 साल तक पूरी टैक्स छूट मिलेगी, जिससे मुंबई और सूरत की स्थिति वैश्विक हीरा व्यापार केंद्र के रूप में और मजबूत होगी।
इनपुट: IANS



