राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं पर खरगे ने सरकार से मांगा जवाब, संसद में चर्चा की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान और चढ़ावे में कथित दुरुपयोग के आरोपों पर केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इस मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं…
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान और चढ़ावे में कथित दुरुपयोग के आरोपों पर केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इस मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण देने और संसद में विस्तृत चर्चा कराने का आग्रह किया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मंगलवार को राज्यसभा में बोलते हुए खरगे ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख किया, जिसमें कीमती चढ़ावे, नकद दान और जमीन के लेन-देन में अनियमितताओं की बात कही गई है। उन्होंने याद दिलाया कि इस ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था और इसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री ने संसद में की थी, साथ ही इसे 70 एकड़ से अधिक भूमि भी हस्तांतरित की गई थी।
प्रधानमंत्री की जवाबदेही पर उठाए सवाल
खरगे ने इस मामले में प्रधानमंत्री की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक के सभी प्रमुख कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है, इसलिए वह अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि इन आरोपों के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि "भगवान श्रीराम के नाम पर लूट" करने वालों को देश से माफी मांगनी चाहिए और जनता को गुमराह करना बंद कर देना चाहिए। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया, जिसके कारण सदन में कुछ देर के लिए हंगामा हुआ।
संसद में चर्चा की मांग
बाद में संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए खरगे ने बताया कि विपक्ष ने दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से राम मंदिर दान विवाद और छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर नियमों के तहत चर्चा की मांग की गई है, क्योंकि सरकार इस बहस से बच रही है।
खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन से अनुपस्थिति पर भी निशाना साधा और कहा कि यह या तो सवालों का सामना करने के डर को दिखाता है या संसदीय परंपराओं के प्रति उदासीनता को। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद के सुचारू संचालन के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।
इनपुट: IANS



