मध्य प्रदेश: सिकल सेल की पहचान के लिए स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों की स्क्रीनिंग पर जोर, राज्यपाल ने दिए निर्देश
मध्य प्रदेश में सिकल सेल बीमारी के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने अधिकारियों से कहा है कि वे प्राइमरी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में…
मध्य प्रदेश में सिकल सेल बीमारी के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने अधिकारियों से कहा है कि वे प्राइमरी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में कैंप लगाकर बच्चों की स्क्रीनिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल ने यह बात 'नेशनल सिकल सेल एलिमिनेशन मिशन 2047' और 'नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम' की समीक्षा बैठक के दौरान कही।
बैठक में राज्यपाल ने इस आनुवंशिक बीमारी से प्रभावित और सिकल सेल ट्रेट वाले बच्चों की जल्द पहचान के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, "बच्चों की शुरुआती स्क्रीनिंग को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि... उन्हें सही काउंसलिंग और फॉलो-अप मिल सके।" पटेल ने बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए उनके स्वास्थ्य और विकास को प्राथमिकता देने और अच्छे नतीजों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
स्वास्थ्य अभियानों में सबकी भागीदारी
राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने इन स्वास्थ्य अभियानों में जनप्रतिनिधियों की अधिक भागीदारी का भी आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि वे सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए संसाधन और आर्थिक मदद जुटाएं। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं को 'सिकल मित्र' बनने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया ताकि जागरूकता फैलाई जा सके। राज्यपाल ने कहा, "सिकल सेल बीमारी और टीबी के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता सबसे अहम हिस्सा है।"
अभियान की मौजूदा स्थिति
इस बैठक में मौजूद उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अभियान की प्रगति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 1.34 करोड़ लोगों की सिकल सेल के लिए स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 92 प्रतिशत को जेनेटिक स्टेटस कार्ड भी दिए जा चुके हैं। जागरूकता अभियान के तहत 4,825 'सिकल मित्र' बनाए गए हैं और यह संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश में टीबी के ठीक होने की दर 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है और मृत्यु दर में कमी आई है।
इनपुट: IANS



