गूगल फायरबेस: कैसे एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन रहा साइबर अपराधियों का नया हथियार?
साइबर अपराधी अब धोखाधड़ी और फिशिंग जैसे अपराधों के लिए गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों के वैध प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने हाल ही में गूगल को…
साइबर अपराधी अब धोखाधड़ी और फिशिंग जैसे अपराधों के लिए गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों के वैध प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने हाल ही में गूगल को उसके फायरबेस प्लेटफॉर्म पर मौजूद कम से कम 57 ऐसी वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी, मैलवेयर फैलाने और संवेदनशील जानकारी चुराने के लिए किया जा रहा था।
यह कार्रवाई इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा गूगल को भेजे गए नोटिस के बाद हुई, जिसमें इन धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का खुलासा हुआ था। यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे अपराधी वैध क्लाउड सेवाओं का फायदा उठाकर अपनी गतिविधियों को सामान्य और भरोसेमंद दिखाने की कोशिश करते हैं।
क्या है गूगल फायरबेस और अपराधी कैसे करते हैं इसका इस्तेमाल?
फायरबेस, गूगल का एक क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसे मोबाइल और वेब एप्लिकेशन बनाने वाले डेवलपर्स की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह वेबसाइट होस्टिंग, डेटा स्टोरेज, यूजर ऑथेंटिकेशन और एनालिटिक्स जैसे कई तैयार टूल प्रदान करता है, जिससे डेवलपर्स को ऐप बनाने में आसानी होती है। यह एक पूरी तरह से वैध और दुनिया भर में लोकप्रिय सेवा है।
हालांकि, अपराधी इन्हीं सुविधाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे फायरबेस पर फर्जी वेबसाइटें होस्ट करते हैं जो बड़े बैंकों और अन्य विश्वसनीय संस्थानों की नकल करती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ वेबसाइटों ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख बैंकों के फर्जी पेज बनाए थे, ताकि उपयोगकर्ताओं को धोखा देकर उनकी संवेदनशील जानकारी हासिल की जा सके।
धोखाधड़ी का पूरा तंत्र
अपराधियों का तरीका बेहद शातिर है। वे सबसे पहले एक फर्जी वेबसाइट बनाते हैं जो किसी सरकारी योजना या बैंक की तरह दिखती है।
उदाहरण के लिए, एक मामले में ठगों ने पीएम-किसान योजना के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाई। इस वेबसाइट के माध्यम से पीड़ितों को एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए उकसाया गया। यह ऐप असल में एक मैलवेयर था जो उपयोगकर्ता के फोन से क्रेडिट कार्ड की जानकारी और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जैसी गोपनीय जानकारी चुरा लेता था।
इसके बाद, चोरी किए गए इस सारे डेटा को फायरबेस पर ही बनाए गए एक डेटाबेस में भेज दिया जाता था, जिस पर अपराधियों का नियंत्रण होता था। इस तरह, फायरबेस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल धोखाधड़ी के हर चरण में किया गया — फर्जी वेबसाइट की मेजबानी से लेकर चोरी हुए डेटा को स्टोर करने तक।
चिंता का विषय क्यों?
फायरबेस जैसे वैध प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से अपराधियों को एक बड़ा फायदा मिलता है। चूंकि यह गूगल की एक विश्वसनीय सेवा है, इसलिए इन पर बनी वेबसाइटें और ऐप कम संदिग्ध लगते हैं। इससे सुरक्षा प्रणालियों को इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस दुरुपयोग के लिए गूगल या फायरबेस सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि यह अपराधियों द्वारा एक वैध सेवा के गलत इस्तेमाल का मामला है। भारत सरकार की हालिया कार्रवाई इसी खतरे से निपटने की एक कड़ी है।
इनपुट: IANS



