रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

गोवा 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड: 2.60 करोड़ की धोखाधड़ी में चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत तीन और गिरफ्तार

गोवा में एक व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' कर 2.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस केस में एक चार्टर्ड…

गोवा 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड: 2.60 करोड़ की धोखाधड़ी में चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत तीन और गिरफ्तार
(फोटो: IANS)

गोवा में एक व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' कर 2.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस केस में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या पांच हो गई है। गोवा की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने तीनों नए आरोपियों को 1 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

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मामले की शुरुआत तब हुई जब गोवा के एक निवासी को वीडियो कॉल पर डराकर यह विश्वास दिलाया गया कि वह एक आपराधिक जांच के दायरे में है। इसके बाद जालसाजों ने उसे 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स' में 2.60 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस घटना को लेकर 9 जून को उत्तरी गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई थी, जिसके आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

ED की जांच में एक बड़े और संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा हुआ है। यह गिरोह धोखाधड़ी से मिले पैसों को बैंकिंग सिस्टम में डालता, फिर उसे कैश में बदलता और अंत में रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त 'फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर' कंपनियों के जरिए विदेशी मुद्रा में बदल देता था। इस तरह काले धन को सफेद बनाया जा रहा था।

एजेंसी ने बताया कि इस रकम को 400 से ज़्यादा खातों में भेजा गया था। ये खाते ऐसी कंपनियों के नाम पर थे जिनके डायरेक्टर सिर्फ कागजों पर थे, जबकि असल में इन खातों को कोई और ही चला रहा था। इन खातों के जरिए 20 से अधिक राज्यों में 330 पीड़ितों से जुड़ी 163 FIR का पता चला है, जिनमें कुल 417.49 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। इन खातों से 27,850 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन भी हुआ है।

गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका

ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 19 के तहत 27 अगस्त को भूषण सूर्यकांत मोये (चार्टर्ड अकाउंटेंट), विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को गिरफ्तार किया। इससे पहले 23 अगस्त को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया गया था।

जांच के अनुसार, चार्टर्ड अकाउंटेंट भूषण मोये ने इस नेटवर्क के लिए 21 फर्ज़ी कंपनियां बनाईं और उनके 43 डमी डायरेक्टरों के इनकम-टैक्स रिटर्न एक साथ दाखिल किए। वहीं, विलास पवार ने धोखाधड़ी के पैसे को नेटवर्क के खातों तक पहुंचाने के लिए RTGS एंट्री का इंतजाम किया, जबकि शैलेश चव्हाण उन ट्रांसफर के बदले कैश उपलब्ध कराता था। ED ने बताया कि 21 अगस्त को इन तीनों के ठिकानों पर तलाशी ली गई थी, लेकिन उनकी गतिविधियां जारी थीं, जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी जरूरी हो गई।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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