रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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नेपाल-तिब्बत बाढ़ त्रासदी: लापता लोगों के परिजनों को ईशा फाउंडेशन ने दी जानकारी, जीवित बचने की उम्मीद कम

ईशा फाउंडेशन ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ में लापता हुए लोगों के परिवारों को एक भावुक संदेश भेजा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, फाउंडेशन ने कहा है कि अब तक मिले तथ्यों…

नेपाल-तिब्बत बाढ़ त्रासदी: लापता लोगों के परिजनों को ईशा फाउंडेशन ने दी जानकारी, जीवित बचने की उम्मीद कम
(फोटो: IANS)

ईशा फाउंडेशन ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ में लापता हुए लोगों के परिवारों को एक भावुक संदेश भेजा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, फाउंडेशन ने कहा है कि अब तक मिले तथ्यों और जमीनी सूचनाओं के आधार पर किसी के जीवित बचने की उम्मीद बेहद कम है। हालांकि, चीन के अधिकारी ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में खोज और बचाव अभियान लगातार चला रहे हैं।

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फाउंडेशन ने अपने विस्तृत अपडेट में बताया कि वे केवल सत्यापित और विश्वसनीय जानकारी ही साझा करना चाहते थे, जिसके कारण सूचना देने में देरी हुई। इसके लिए टीम ने विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई और मौके पर मौजूद संपर्कों के माध्यम से उसकी पुष्टि की।

तलाशी अभियान और जमीनी हकीकत

ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, ग्यिरोंग पोर्ट पर चीनी प्रशासन की टीमें उपकरणों के साथ तलाशी अभियान में जुटी हैं। हालांकि, 28 अगस्त को बाढ़ के दूसरे खतरे के कारण इसे कुछ देर रोकना पड़ा था, जिसे बाद में स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू कर दिया गया। स्थानीय विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से फाउंडेशन ने बताया कि ग्यिरोंग पोर्ट की घाटी में 45 से 50 फीट तक मलबा और गाद जमा हो गया है।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों, वीडियो और सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ का वेग इतना प्रचंड था कि पानी और मलबे का मिश्रण लगभग 150 फीट की ऊंचाई तक उठा, जिसने पूरे इमिग्रेशन ऑफिस परिसर को नष्ट कर दिया। फाउंडेशन ने कहा कि इस क्षेत्र से किसी के भी जीवित मिलने का कोई संकेत नहीं मिला है।

समन्वय और बचाव प्रयासों की स्थिति

ईशा फाउंडेशन की टीमें सीमा के दोनों ओर तैनात हैं। चीन की तरफ टीम को घटनास्थल से लगभग 25 किलोमीटर दूर तक जाने की अनुमति है, जहाँ से वे बचाव अधिकारियों के संपर्क में हैं। नेपाल की ओर समन्वय टीम काठमांडू में है, क्योंकि सड़कें और पुल बह जाने से प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचना संभव नहीं है।

फाउंडेशन ने यह भी बताया कि वे भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय, काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों और नेपाली सेना सहित अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक चीन या नेपाल द्वारा जारी की गई बचाए गए लोगों की किसी भी सूची में उनके समूह के किसी सदस्य का नाम नहीं मिला है।

परिवारों को संदेश

ईशा फाउंडेशन ने प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे एक "अकल्पनीय त्रासदी" बताया है। फाउंडेशन ने भरोसा दिलाया है कि जैसे ही कोई नई और सत्यापित जानकारी मिलेगी, उसे तुरंत साझा किया जाएगा और परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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