रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

आरक्षण में वर्गीकरण पर NDA में रार: चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी से मांगा इस्तीफा

बिहार में एनडीए के दो सहयोगी दलों के बीच अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा (सब-कोटा) को लेकर विवाद गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा…

आरक्षण में वर्गीकरण पर NDA में रार: चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी से मांगा इस्तीफा
(फोटो: IANS)

बिहार में एनडीए के दो सहयोगी दलों के बीच अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा (सब-कोटा) को लेकर विवाद गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी के रुख पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे और उनके बेटे से मंत्री पद छोड़ने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यह टकराव खुलकर सामने आ गया है।

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शनिवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी दलित आरक्षण में किसी भी तरह के उप-कोटा के सख्त खिलाफ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित वर्ग की ताकत उनकी एकजुटता में है, और आरक्षण के भीतर किसी भी तरह का बंटवारा पूरे वर्ग को नुकसान पहुंचाएगा।

चिराग पासवान का तर्क और इस्तीफे की मांग

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था को संविधान की भावना के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा, "अनुसूचित जाति के लोगों को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के आधार पर आरक्षण मिला है। संविधान में यह नहीं कहा गया है कि एससी आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।"

पासवान ने जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह आरक्षण में क्रीमी लेयर या वर्गीकरण का समर्थन करते हैं, तो उन्हें पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन को भी बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। चिराग पासवान ने कहा कि इस तरह के बड़े फैसलों पर चर्चा सिर्फ संसद में ही होनी चाहिए।

जीतन राम मांझी का पलटवार और दलीलें

वहीं, जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर मोतिहारी में होने वाली अपनी सभा में विस्तार से बात रखेंगे। मांझी ने तर्क दिया कि संविधान लागू होने के दशकों बाद भी अनुसूचित जाति की कई जातियां हाशिए पर हैं।

उन्होंने दावा किया, "बिहार में अनुसूचित जाति की करीब 22 जातियां हैं, जिनमें कुछ को छोड़कर बाकी जातियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।" मांझी ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण की अनुमति देने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे कुछ राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। मांझी ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि इसके लाभ से वंचित समुदायों को हिस्सेदारी दिलाना है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी उठाया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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