गढ़चिरौली: आदिवासी आश्रम स्कूल में सांप काटने से 3 बच्चियों की मौत, शिवसेना ने व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक आदिवासी आश्रम स्कूल में 6 छात्राओं को ज़हरीले सांप ने काट लिया, जिसमें से तीन की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने आदिवासी इलाकों में सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाहियों…
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक आदिवासी आश्रम स्कूल में 6 छात्राओं को ज़हरीले सांप ने काट लिया, जिसमें से तीन की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने आदिवासी इलाकों में सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाहियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। शिवसेना (UBT) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इस त्रासदी को लेकर राज्य प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह घटना गढ़चिरौली जिले के धनोरा तालुका में स्थित जपतलाई के एक सरकारी सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूल (आश्रम स्कूल) में हुई। यह घटनाक्रम ठीक उस दिन हुआ जब विश्व मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा था। सांप के काटने की शिकार हुईं छह में से तीन छात्राओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासन और खनन पर गंभीर आरोप
शिवसेना ने 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में दावा किया है कि भले ही इलाके में नक्सली गतिविधियां कम हो गई हैं, लेकिन आदिवासियों का जीवन अब भी दूसरे खतरों से घिरा हुआ है। संपादकीय में प्रशासन पर आरोप लगाया गया कि वह बाहरी खनन उद्यमियों को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों को उनकी जमीन, जंगल और पानी से व्यवस्थित रूप से विस्थापित कर रहा है। यह भी आरोप लगाया गया कि खनन के लिए चलने वाले तेज रफ्तार ट्रकों की चपेट में आने से अब तक 1500 से ज्यादा स्थानीय निवासी अपनी जान गंवा चुके हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
पार्टी के मुखपत्र में पूरे गढ़चिरौली में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी का भी ज़िक्र किया गया है। आपात स्थिति में मरीज़ों को लाने-ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक नहीं है, जिस वजह से गंभीर मरीज़ों और गर्भवती महिलाओं को कपड़े से बने स्ट्रेचर पर मीलों पैदल ले जाना पड़ता है। संपादकीय के मुताबिक, आश्रम स्कूलों का बुनियादी ढांचा भी जर्जर हो चुका है। इमारतों में दरारें हैं, स्वच्छता की कमी है और बच्चों को फर्नीचर के अभाव में नंगे फर्श पर सोना पड़ता है।
खनन से बिगड़ा पर्यावरण संतुलन
संपादकीय में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि बड़े पैमाने पर हो रहे खनन ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नष्ट कर दिया है। इस वजह से तेंदुए और सांप जैसे जंगली जानवर रिहायशी इलाकों और स्कूलों में घुस रहे हैं। शिवसेना ने यह भी कहा कि औद्योगिक गतिविधियों से पर्यावरण बुरी तरह प्रदूषित हो रहा है और औद्योगिक कचरा आदिवासियों के घरों में पके भोजन तक पर जमा हो रहा है, जिससे उन्हें दूषित पानी और भोजन का सेवन करना पड़ रहा है।
इनपुट: IANS



