जयपुर नगर निगम चुनाव 2026: BJP ने जारी की उम्मीदवारों की सूची, पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल भी मैदान में
जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नामांकन के आखिरी दिन अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी ने एक लंबी और गहन मंथन प्रक्रिया के बाद…
जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नामांकन के आखिरी दिन अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी ने एक लंबी और गहन मंथन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों का चयन किया, जिसमें कई अनुभवी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को भी टिकट दिया गया है। पार्टी की सबसे बड़ी चिंता असंतुष्ट दावेदारों की बगावत को रोकना था, जिसके लिए खास रणनीति अपनाई गई।
यह सूची मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर और जयपुर के पार्टी प्रभारियों की देखरेख में रविवार देर रात तक चली बैठकों के बाद फाइनल हुई। पार्टी ने असंतोष और बगावत की आशंका को कम करने के लिए उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की। इसके बजाय, चयनित उम्मीदवारों को नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पहले सीधे आधिकारिक फॉर्म-बी और पार्टी का चुनाव चिन्ह सौंपा गया।
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को पार्षद का टिकट
इस सूची का सबसे चर्चित नाम जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल का है। कांग्रेस की पहली महिला मेयर रह चुकीं और लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं खंडेलवाल अब भाजपा के टिकट पर वार्ड स्तर का पार्षद चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उनके राजनीतिक सफर में यह एक बड़ा मोड़ है, जिसने जयपुर के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। खंडेलवाल ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्षद के रूप में ही की थी।
संतुलन साधने की कोशिश
भाजपा ने अपनी सूची में कई तरह के समीकरणों को साधने का प्रयास किया है। इसमें पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं, महिला मोर्चा की पदाधिकारियों और हाल ही में कांग्रेस से आए पूर्व पार्षदों को भी जगह दी गई है।
- अनुराधा माहेश्वरी: भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अनुराधा माहेश्वरी को वार्ड 107 से उम्मीदवार बनाया गया है।
- नीरज अग्रवाल: हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए पूर्व पार्षद नीरज अग्रवाल को वार्ड 121 से दोबारा टिकट मिला है।
कई वार्डों में टिकट के लिए 10 से 15 मजबूत दावेदार थे, जिससे पार्टी के भीतर काफी प्रतिस्पर्धा थी। अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, भाजपा का पूरा ध्यान असंतुष्टों को मनाने पर है, ताकि वे 2 सितंबर तक अपना नाम वापस ले लें और पार्टी को बागियों से नुकसान न हो।
इनपुट: IANS



