रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, घरेलू फंड्स ने संभाला मोर्चा

लगातार तीसरे सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ारों से अपनी पूंजी निकाली, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की ज़ोरदार खरीदारी ने बाज़ार को बड़ा सहारा दिया। समाचार एजेंसी…

भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, घरेलू फंड्स ने संभाला मोर्चा
(फोटो: IANS)

लगातार तीसरे सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ारों से अपनी पूंजी निकाली, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की ज़ोरदार खरीदारी ने बाज़ार को बड़ा सहारा दिया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बीच एक स्पष्ट अंतर देखने को मिला, जिससे बाज़ार में बड़ी गिरावट नहीं आई।

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आंकड़ों पर नज़र डालें तो पिछले हफ़्ते FIIs ने भारतीय शेयर बाज़ार से कुल 5,610 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की। बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक, सप्ताह के तीन कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे, जिसमें 31 अगस्त को हुआ एमएससीआई सूचकांक का पुनर्संतुलन सत्र भी शामिल था। इसके ठीक विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाज़ार में भरोसा जताते हुए 23,160 करोड़ रुपए के शेयरों की भारी ख़रीदारी की।

गिरावट के पीछे बड़े कारण

प्रमुख सूचकांकों में लगातार चौथे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम रहे। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति की अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़े, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ने की आशंका है। ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई और कंपनियों की लागत, दोनों को बढ़ा सकती हैं।

बाज़ार का मिला-जुला प्रदर्शन

मुख्य सूचकांकों में कमज़ोरी के बावजूद बाज़ार की समग्र स्थिति अपेक्षाकृत मज़बूत बनी रही। सप्ताह के दौरान निफ्टी 1.2% की साप्ताहिक गिरावट के साथ 23,897 अंक पर बंद हुआ। हालांकि, व्यापक बाज़ार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। एक तरफ जहाँ निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में मुनाफावसूली के चलते 1.5% की गिरावट आई, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.1% की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।

बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि बेंचमार्क सूचकांकों और व्यापक बाज़ार के प्रदर्शन का यह अंतर बताता है कि निवेशक आँखें मूंदकर बिकवाली नहीं कर रहे हैं। उनका ध्यान मज़बूत आय वृद्धि की संभावना वाली कंपनियों पर बना हुआ है। सप्ताह के आख़िरी कारोबारी दिन मेटल, बीमा और कुछ चुनिंदा वित्तीय शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशक बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद वाले क्षेत्रों में पैसा लगा रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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