आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारतीय शेयर बाज़ार में दम, कॉर्पोरेट मुनाफ़े में 17% की बढ़ोतरी का अनुमान
जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस वुड द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर मज़बूत संकेत दिए गए हैं। 'एशिया मैक्सिमा' नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक, अगले वित्…
जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस वुड द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर मज़बूत संकेत दिए गए हैं। 'एशिया मैक्सिमा' नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के मुनाफे में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए यह अनुमान 14 प्रतिशत है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस जानकारी के अनुसार, इन सकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाज़ार अन्य क्षेत्रीय बाज़ारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
रिपोर्ट में भारत की संरचनात्मक विकास की कहानी को बरकरार बताते हुए कहा गया है कि आर्थिक आंकड़े भी मज़बूत बने हुए हैं। इसी आधार पर वित्त वर्ष 2027 तक भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत रह सकती है।
बैंक क्रेडिट और निवेश में मज़बूती
रिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर के मज़बूत आंकड़ों पर भी ध्यान दिलाया गया है। सितंबर के मध्य तक बैंकों के क्रेडिट में साल-दर-साल 18.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, अगस्त महीने में कॉर्पोरेट लोन में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। छोटे, मध्यम और सूक्ष्म उद्यमों (MSME) को दिए जाने वाले कर्ज़ में 25.5 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि बैंकों में जमा राशि 17.3 प्रतिशत बढ़ी।
विश्लेषकों का मानना है कि कॉर्पोरेट कर्ज़ में यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि निजी क्षेत्र में पूंजीगत व्यय का जिस चक्र का लंबे समय से इंतज़ार था, वह आखिरकार शुरू हो सकता है। इसे इस बात से भी समर्थन मिलता है कि अगस्त में समाप्त हुए 12 महीनों में मशीनरी का आयात 66 अरब डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा सिर्फ 29 अरब डॉलर था।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
बाज़ार के मौजूदा प्रदर्शन की बात करें तो इस साल भारतीय शेयर बाज़ार डॉलर के मुकाबले 15.6 प्रतिशत गिरा है। स्थानीय मुद्रा में निफ्टी 13.4 प्रतिशत नीचे है, जो इंडोनेशिया (42.3% गिरावट) के बाद दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है। इसके बावजूद, जेफरीज की रिपोर्ट एमएससीआई एसी एशिया पैसिफिक (जापान को छोड़कर) इंडेक्स में भारत के लिए 12 प्रतिशत आवंटन की सिफारिश करती है, जो इंडेक्स में भारत के वास्तविक वेटेज (10.5%) से ज़्यादा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 की शुरुआत से 10.7 प्रतिशत की गिरावट के बाद भारतीय रुपया शायद अपने निचले स्तर पर पहुँच गया है।
इनपुट: IANS



