सेबी ने बदला सेटलमेंट का तरीका: 10 लाख तक के मामलों के लिए अब 'फास्ट-ट्रैक' सुविधा
शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन संशोधि…
शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन संशोधित नियमों का मकसद सेटलमेंट की प्रक्रिया को सरल और ज्यादा पारदर्शी बनाना है। इसके तहत, 10 लाख रुपए तक के मामलों के लिए एक 'फास्ट-ट्रैक' व्यवस्था भी शुरू की गई है।
सेटलमेंट रेगुलेशन्स, 2026 के तहत अब निपटारे की शर्तों में सेटलमेंट की रकम, गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे की वापसी और कुछ सुधारात्मक उपाय शामिल होंगे। इन सुधारात्मक उपायों को पहले 'नॉन-मॉनेटरी' शर्तें कहा जाता था। नए नियमों में गलत तरीके से कमाए गए लाभ की वसूली के लिए एक अलग प्रावधान किया गया है, ताकि सेटलमेंट की कुल राशि की गणना करते समय इसे दो बार न गिना जाए।
समझिए कैसे तय होगी सेटलमेंट की रकम
सेबी ने सेटलमेंट की रकम की गणना के लिए एक नया फॉर्मूला पेश किया है। अब सेटलमेंट की रकम एक 'बेस अमाउंट' से तय होगी, जो संबंधित कानून के उल्लंघन के लिए निर्धारित न्यूनतम जुर्माने से जुड़ी होगी। इस बेस अमाउंट को तय करते समय कई बातों का ध्यान रखा जाएगा, जैसे- कानूनी खर्च, कार्यवाही किस चरण में है, उल्लंघन कितना गंभीर है और मामले को गंभीर या कम गंभीर बनाने वाले अन्य कारक।
हालांकि, इस बेस अमाउंट में गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की राशि शामिल नहीं होगी। इन राशियों को अलग से वसूला जाएगा, जिससे प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता आएगी।
फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट की प्रक्रिया
सेबी ने दो तरह के फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट शुरू किए हैं: एक जो उल्लंघन की प्रकृति पर आधारित है और दूसरा जो मामले की मौद्रिक सीमा पर आधारित है।
जब सेटलमेंट की रकम 10 लाख रुपए या उससे कम होगी, तो मामले सीधे एक आंतरिक समिति से होल-टाइम मेंबर्स (WTM) के पैनल के पास भेजे जाएंगे। वहीं, उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर होने वाले फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट में, सेबी संबंधित संस्था को एक नोटिस भेजेगा। इस नोटिस में बताई गई रकम का भुगतान करके मामले को निपटाने का विकल्प दिया जाएगा। रकम का भुगतान होने पर पैनल सेटलमेंट का आदेश जारी कर देगा।
नए नियमों में वित्तीय विवरणों में हेरफेर या फंड के दुरुपयोग जैसे मामलों के सेटलमेंट का भी प्रावधान है, बशर्ते कि जरूरी सुधारात्मक उपाय किए जाएं। इनमें गलतियों का खुलासा करना और डायवर्ट किए गए फंड की रिकवरी शामिल है।
इनपुट: IANS



