शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिश लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं: पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कुछ राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग की साख पर सवाल उठाने की कोशिशों की आलोचना की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह…

चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिश लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं: पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
(फोटो: IANS)

पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कुछ राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग की साख पर सवाल उठाने की कोशिशों की आलोचना की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह निशाना बनाना देश और लोकतंत्र के हित में नहीं है। उनका यह बयान शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए एक विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में आया है।

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यह विरोध प्रदर्शन नागरिक समाज संगठन CJP द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने और कथित "वोट चोरी" जैसे मुद्दों को उठाया गया।

संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान ज़रूरी

वेंकैया नायडू ने सार्वजनिक रैलियों के माध्यम से चुनाव आयुक्तों के इस्तीफे की मांग करने के तरीके पर असहमति जताई। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जिस तरह से कुछ लोग चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, वह ठीक नहीं है और न ही यह देश या लोकतंत्र के हित में है। चुनाव आयोग एक वैधानिक संस्था है।"

उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के लिए तय प्रक्रियाएं हैं, लेकिन "उन पर आरोप लगाना, उन्हें बुरा-भला कहना, उनके नाम को विवादों में घसीटना और फिर सार्वजनिक रैलियों के जरिए उनके इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है।"

भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना

पूर्व उपराष्ट्रपति ने भारतीय चुनावी प्रक्रिया की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी और सम्मानित प्रणालियों में से एक है। उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहा है। लोग भारतीय चुनावी प्रणाली की तारीफ करते हैं। हमारे चुनाव आयोग ने भी बहुत अच्छा नाम कमाया है।"

उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि चुनाव परिणामों के आधार पर आयोग की आलोचना करना एक प्रवृत्ति बन गई है। नायडू के अनुसार, "अगर वे चुनाव जीतते हैं, तो चुनाव आयोग अच्छा है। अगर वे चुनाव हारते हैं, तो ईवीएम खराब, दोषपूर्ण और सरकार के पक्ष में होती हैं। इस तरह के आरोप सही नहीं हैं।"

राजनीतिक दलों की ज़िम्मेदारी

नायडू ने वोटर लिस्ट को दुरुस्त रखने में राजनीतिक दलों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह दलों और उनके कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी है कि वे घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जांच करें और किसी भी गड़बड़ी, चूक या नाम जोड़ने-हटाने की ज़रूरत पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने बिहार चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा, "एक भी वोटर ने यह शिकायत नहीं की कि उसका नाम हटा दिया गया है।"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के फैसले सामूहिक होते हैं, इसलिए किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना अनुचित है।

शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार

अंत में, वेंकैया नायडू ने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन साथ ही इसे शांतिपूर्ण रखने की अपील की। उन्होंने कहा, "लोगों को विरोध करने का अधिकार है। लेकिन साथ ही, किसी को भी हिंसा नहीं करनी चाहिए या सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट नहीं करना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति देनी चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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