रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ई-कॉमर्स डिलीवरी पर नया टैक्स? सरकार ने वायरल दावे को बताया 'फर्जी', कहा- टैक्स घटाया गया है, बढ़ाया नहीं

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर 5% का नया जीएसटी लगा दिया है। अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड…

ई-कॉमर्स डिलीवरी पर नया टैक्स? सरकार ने वायरल दावे को बताया 'फर्जी', कहा- टैक्स घटाया गया है, बढ़ाया नहीं
(फोटो: IANS)

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर 5% का नया जीएसटी लगा दिया है। अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस दावे का खंडन करते हुए इसे पूरी तरह से गलत बताया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआईसी ने स्पष्ट किया है कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, बल्कि पहले से लागू टैक्स को कम किया गया है।

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सीबीआईसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वायरल पोस्ट का जवाब देते हुए कहा, "इस पोस्ट में किया गया दावा फर्जी और तथ्यों के आधार पर गलत है।" सरकार ने बताया कि फूड ऐप्स जैसी डिलीवरी सेवाओं पर पहले 18% जीएसटी लगता था। अब इसे घटाकर 5% कर दिया गया है। यह फैसला जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में की गई सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।

टैक्स में कटौती, न कि बढ़ोतरी

सरकारी एजेंसी के मुताबिक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दी जाने वाली सभी डिलीवरी सेवाओं पर अब एक समान 5% टैक्स लगेगा। एजेंसी ने कहा, "इसलिए, कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। इसके विपरीत टैक्स में कमी की गई है।" विभाग ने लोगों से गलत खबरें न फैलाने का भी अनुरोध किया है। वायरल पोस्ट में यह कहकर सरकार पर निशाना साधा गया था कि टैक्स न बढ़ाने के दावे के 48 घंटे बाद ही वित्त मंत्री ने यह नया टैक्स लगा दिया है।

जीएसटी काउंसिल के अन्य अहम फैसले

गुरुवार को हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में व्यापार को आसान बनाने के लिए कई अन्य निर्णय भी लिए गए। इसमें रिफंड प्रक्रिया को तेज करना और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दायरा बढ़ाना शामिल है।

व्यापारियों के लिए राहत: अब रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। अगर 10 दिनों के भीतर दावे पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो उसे स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा। इसके अलावा, कर्मचारियों के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, फैक्ट्रियों के बाहर लगे टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर भी अब आईटीसी का लाभ मिलेगा। साथ ही, कानूनी तौर पर नष्ट किए जाने वाले फ्री सैंपल और एक्सपायर हो चुके स्टॉक पर भी आईटीसी क्लेम किया जा सकेगा।

इनपुट: IANS

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