रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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मनोज सिन्हा: जम्मू-कश्मीर वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए अगला बड़ा डेस्टिनेशन बनने को तैयार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि प्रदेश अपनी युवा प्रतिभा, बेहतर होते बुनियादी ढांचे और निवेशक-अनुकूल नीतियों के दम पर वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य…

मनोज सिन्हा: जम्मू-कश्मीर वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए अगला बड़ा डेस्टिनेशन बनने को तैयार
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि प्रदेश अपनी युवा प्रतिभा, बेहतर होते बुनियादी ढांचे और निवेशक-अनुकूल नीतियों के दम पर वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। शनिवार को जम्मू-कश्मीर वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) शिखर सम्मेलन 2026 के समापन सत्र में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को अपने अगले इनोवेशन या टैलेंट हब के लिए जम्मू-कश्मीर को क्यों चुनना चाहिए।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे मेहराब पुल का उदाहरण देते हुए कहा कि आज जम्मू-कश्मीर में बड़े और परिवर्तनकारी लक्ष्यों को हासिल करने का आत्मविश्वास है। उन्होंने कहा, "मैं वैश्विक क्षमता केंद्रों को भी इसी साहस और सहयोग की भावना से प्रेरित देखता हूं और ये मिलकर अपनी अलग-अलग क्षमताओं से कहीं अधिक शक्ति उत्पन्न कर सकते हैं।"

स्टार्टअप और युवा प्रतिभा में अभूतपूर्व वृद्धि

उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में हुए तेज बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी और प्रमुख ढांचागत विकास से औद्योगिक निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिला है। उन्होंने आँकड़े देते हुए कहा, “2020 में केवल 69 स्टार्टअप थे और अब यह संख्या बढ़कर 1,305 हो गई है, जो 1,800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।” उनके मुताबिक, जब इसमें आईआईएम जम्मू, आईआईटी जम्मू और एनआईटी श्रीनगर जैसे संस्थानों के युवाओं की ऊर्जा जुड़ती है, तो एक तैयार कार्यबल सामने आता है।

निवेशकों के लिए जम्मू-कश्मीर क्यों है आकर्षक?

मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर को एक आकर्षक जीसीसी डेस्टिनेशन बनाने वाले छह प्रमुख लाभ गिनाए। इनमें मजबूत वित्तीय सहायता, कम परिचालन लागत, अग्रणी बहुराष्ट्रीय निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन, और स्थानीय प्रतिभा की वापसी शामिल है। साथ ही, उन्होंने कृषि-तकनीक, पर्यटन-तकनीक और हस्तशिल्प डिजिटलीकरण जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में मौजूद अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

भविष्य की रणनीति और अवसर

भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक जीसीसी केंद्र हैं, जिनमें 19 लाख से ज्यादा पेशेवर काम कर रहे हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि अब ये केंद्र महानगरों से आगे निकलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी फैल रहे हैं, जो जम्मू-कश्मीर के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए एक चार-सूत्रीय रोडमैप भी प्रस्तुत किया, जिसमें प्रतिभा विकास, विश्वास निर्माण, स्थानीय लाभों का उपयोग और समावेशी विकास पर जोर दिया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि जीसीसी अगले दशक में जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक इकोसिस्टम का एक अभिन्न हिस्सा बन सकते हैं।

इनपुट: IANS

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