280 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी: ED ने पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर की छापेमारी, दो CA जांच के घेरे में
पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई करीब 280 करोड़ रुपये की…
पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई करीब 280 करोड़ रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी है, जिसमें झारखंड के एक पावर प्लांट के लिए लिए गए लोन की रकम को कोलकाता भेजा गया था।
एजेंसी की जांच के केंद्र में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं, जिन पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये के हेरफेर का आरोप है। ईडी ने कोलकाता के अलावा हुगली जिले के उत्तरपारा, पश्चिम बर्धमान के आसनसोल और हावड़ा में भी छापेमारी की। केंद्रीय बलों के जवान भी ईडी की टीमों के साथ मौजूद थे।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, यह मामला 'कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड' (KPPL) नामक एक निजी कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने झारखंड में 66 मेगावाट का पावर प्लांट स्थापित करने के नाम पर बैंकों के एक समूह (बैंक कंसोर्टियम) से लगभग 280 करोड़ रुपये का लोन लिया था। हालांकि, इस रकम का इस्तेमाल प्रोजेक्ट के लिए करने के बजाय, इसे कथित तौर पर शेल कंपनियों के एक नेटवर्क के जरिए हड़प लिया गया।
जांच के दायरे में कौन-कौन?
इस वित्तीय घोटाले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक सारथी की भूमिका को ईडी अहम मान रही है। एजेंसी ने शुक्रवार सुबह कोलकाता के लेक टाउन स्थित 'अवनी ऑक्सफोर्ड (फेज 1)' हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में सारथी के घर पर छापेमारी की। वहां उनसे पूछताछ के साथ-साथ डिजिटल दस्तावेजों, बैंक खातों और अन्य कागजों की गहन जांच की गई।
इसके अलावा, हुगली के उत्तरपारा स्थित शिबतला स्ट्रीट में एक अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट सुदीप्तो घोष के घर पर भी ईडी की टीम पहुंची। एजेंसी ने उनके परिवार से पूछताछ की और घर की तलाशी ली। हालांकि, सुदीप्तो घोष ने इस मामले से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है और कहा है कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुई जांच?
ईडी के अनुसार, यह जांच 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' (SFIO) द्वारा कोलकाता की एक विशेष अदालत में दायर शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। इससे पहले, 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया' (IBBI) की रिपोर्ट पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने कंपनी के कामकाज की जांच का आदेश दिया था।
इनपुट: IANS



