गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

शिक्षक भर्ती के नए नियम पर बंगाल में विवाद, चुनाव लड़ने पर रोक को कोर्ट में चुनौती देगी CPM

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के एक फैसले ने राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने भविष्य में भर्ती होने वाले शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का फैसला किया है, जिसे मार्क्सवादी…

शिक्षक भर्ती के नए नियम पर बंगाल में विवाद, चुनाव लड़ने पर रोक को कोर्ट में चुनौती देगी CPM
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के एक फैसले ने राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने भविष्य में भर्ती होने वाले शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का फैसला किया है, जिसे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने असंवैधानिक बताते हुए कानूनी चुनौती देने का ऐलान किया है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, CPM के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य विकास रंजन भट्टाचार्य इस मामले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) के भर्ती नियमों का हिस्सा बनेगा, वह इसे कानूनी तौर पर चुनौती देंगे।

कानूनी लड़ाई का ऐलान

कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर और वरिष्ठ अधिवक्ता भट्टाचार्य ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा, "आम लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाना आसान नहीं होगा। ऐसा करने की किसी भी कोशिश का कानूनी रूप से विरोध किया जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को चुनाव लड़ने से रोकने का यह निर्णय पूरी तरह से असंवैधानिक है।

क्या है सरकार का फैसला?

यह पूरा मामला बुधवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की घोषणा के बाद सामने आया। उन्होंने बताया था कि राज्य कैबिनेट की बैठक में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत WBSSC के भर्ती नियमों में एक नई शर्त जोड़ी जाएगी। इस शर्त के अनुसार, नए भर्ती होने वाले शिक्षक किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि यह नियम उन शिक्षकों पर लागू नहीं होगा जो पहले से नौकरी में हैं और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे हैं।

फैसले पर उठ रहे सवाल

CPM के अलावा, सेवारत शिक्षकों का एक वर्ग भी इस फैसले से सहमत नहीं है। सरकार का तर्क है कि यह कदम शिक्षा क्षेत्र को राजनीति से मुक्त करने के लिए उठाया गया है, लेकिन आलोचक इसे खारिज कर रहे हैं। एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री शिक्षा को राजनीति से मुक्त करने को लेकर गंभीर होते, तो उन्होंने शिक्षा से जुड़ी विभिन्न समितियों से राजनीतिक लोगों को हटा दिया होता।" उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा कानून शिक्षकों को सक्रिय राजनीति में शामिल होने से नहीं रोकते, और बिना कानून में बदलाव किए इस फैसले को लागू करने में कानूनी बाधाएं आ सकती हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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