शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

IDBI बैंक बिक्री: राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना, कर्मचारियों के साथ खड़े होने का किया ऐलान

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी बेचने की योजना की कड़ी आलोचना की है। शुक्रवार को उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया…

IDBI बैंक बिक्री: राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना, कर्मचारियों के साथ खड़े होने का किया ऐलान
(फोटो: IANS)

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी बेचने की योजना की कड़ी आलोचना की है। शुक्रवार को उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कांग्रेस के शासनकाल में स्थापित की गई संस्थाओं को बेच रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने इस प्रस्तावित विनिवेश के खिलाफ बैंक कर्मचारियों के प्रति अपना समर्थन भी जताया।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा, "कांग्रेस के समय आईडीबीआई को देश के उद्योग को बनाने के लिए स्थापित किया गया था। पीएम मोदी के समय पहले बोली लगी, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के समय बैंक बनाए जा रहे थे, पीएम मोदी के समय बेचे जा रहे हैं। मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं।"

कर्मचारियों को पत्र और सरकार से सवाल

राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम एक पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने पिछले साल मार्च में संसद भवन में हुई एक मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि कर्मचारियों ने उनसे पूछा था कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से मुनाफे में लाया है। राहुल ने बताया कि उन्होंने यह सवाल लोकसभा में भी उठाया था, "मैंने पूछा कि एक मुनाफे वाले सरकारी बैंक को क्यों बेचा जा रहा है और उसके कर्मचारियों और जमाकर्ताओं की सुरक्षा कैसे होगी? सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। अब उसने आईडीबीआई बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है।"

मुनाफे में लौटे बैंक को बेचने पर आपत्ति

कांग्रेस नेता ने बैंक के प्रदर्शन में कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सात साल पहले आईडीबीआई बैंक घाटे में था, लेकिन पिछले साल इसने नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। उन्होंने कहा, "यह बदलाव आपका काम है।" राहुल गांधी ने हिस्सेदारी घटाने के सरकारी फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि करदाताओं के पैसे से बनी सार्वजनिक संस्थाएं जनता की संपत्ति हैं। वर्तमान में, सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास बैंक की लगभग 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो बिक्री के बाद घटकर लगभग 34 प्रतिशत रह जाएगी।

पुराने वादे और भविष्य की चिंताएं

राहुल गांधी ने 2003 में संसद में दिए गए सरकार के उस आश्वासन की भी याद दिलाई, जिसमें आईडीबीआई बैंक में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का वादा किया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि इस निजीकरण से कर्मचारियों की सेवा शर्तों के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के प्रावधानों पर भी असर पड़ सकता है। अपने पत्र के अंत में उन्होंने कहा, "सरकारी बैंक बेचने की संपत्ति नहीं हैं, वे देश बनाने के औजार हैं। मैं आज आपकी लड़ाई में आपके साथ खड़ा हूं और आपकी सभी जायज मांगों का पूरी तरह समर्थन करता हूं।"

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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