गिग और असंगठित कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का ढाँचा तैयार, केंद्र ने राष्ट्रीय बोर्ड का गठन किया
देश के करोड़ों गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन श्रमिकों के लिए…
देश के करोड़ों गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (सोशल सिक्योरिटी बोर्ड) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ये बोर्ड इन कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करने और उनकी निगरानी का काम करेंगे।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इन बोर्डों का गठन सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उस बड़ी श्रम शक्ति को सुरक्षा देना है, जो लंबे समय से किसी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर थी, जैसे कि ऑनलाइन डिलीवरी, राइड-हेलिंग और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों कर्मचारी।
बोर्ड की संरचना और प्रमुख जिम्मेदारियाँ
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री इन बोर्डों की अध्यक्षता करेंगे। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के अलावा, विभिन्न हितधारकों को भी शामिल किया जाएगा। बोर्ड के सदस्यों में एग्रीगेटर कंपनियों, उद्योग जगत, श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के प्रतिनिधि भी होंगे।
इन बोर्डों के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:
- विभिन्न श्रमिक वर्गों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करना।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
- केंद्र द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के कामकाज की निगरानी करना।
- राज्यों में रिकॉर्ड प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा करना और सामाजिक सुरक्षा कोष के खर्च का परीक्षण करना।
मंत्रालय के अनुसार, इन बोर्डों की बैठक साल में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी, जिसके नियम केंद्र सरकार तय करेगी।
श्रम सुधारों की दिशा में अगला कदम
सरकार का मानना है कि इन बोर्डों का गठन असंगठित क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था से जुड़े श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह कदम हाल के वर्षों में किए गए व्यापक श्रम कानून सुधारों का ही एक हिस्सा है।
सितंबर में हुई एक चर्चा का हवाला देते हुए बताया गया कि उद्योग जगत और श्रमिक संगठनों ने भी नए श्रम कोड को एक सकारात्मक बदलाव माना है, जो नियंत्रण-आधारित व्यवस्था से सहयोग-आधारित व्यवस्था की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। उस दौरान श्रम मंत्रालय के सचिव चंद्र भूषण कुमार ने कहा था कि नए सुधारों में कानूनों का एकीकरण, प्रक्रियाओं का सरलीकरण, डिजिटल पोर्टल की शुरुआत और वेतन की परिभाषा में समानता लाना शामिल है, जिससे श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ेगी और व्यवसायों के लिए अनुपालन का बोझ कम होगा।
इनपुट: IANS



