इंदौर बैंक धोखाधड़ी: ED ने 13 करोड़ की 18 संपत्तियां कुर्क कीं, जानें क्या है मामला
मध्य प्रदेश के इंदौर में बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निर्णायक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, ईडी ने आलोक शारदा और अन्य लोगों से…
मध्य प्रदेश के इंदौर में बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निर्णायक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, ईडी ने आलोक शारदा और अन्य लोगों से जुड़े इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 18 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिनकी कुल कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
यह कार्रवाई भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज दो अलग-अलग एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इन एफआईआर में आईडीबीआई बैंक और एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC), मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
कैसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम?
ईडी के अनुसार, इंदौर जिले के मानपुर में स्थित मेसर्स शारदा वेयरहाउस के मालिक आलोक शारदा ने अन्य लोगों के साथ मिलकर एक संगठित साजिश रची। उन्होंने किसानों के कृषि उत्पादों को अपने गोदाम में जमा दिखाकर फर्जी वेयरहाउस रसीदें जारी कीं। इन्हीं रसीदों के आधार पर 42 किसानों के नाम पर सोयाबीन और चने की कुल 62,965 बोरियों के बदले ऋण स्वीकृत कराए गए। बाद में जांच में पता चला कि बैंक के पास गिरवी रखा गया यह सारा माल बिना किसी अनुमति के वहां से हटाकर बेच दिया गया था।
बैंकों को 26 करोड़ का चूना
ईडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस धोखाधड़ी के चलते आईडीबीआई बैंक को 14.04 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसी तरह के एक अन्य मामले में, मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने भी उसी वेयरहाउस में रखे कृषि उत्पादों के बदले आलोक शारदा को 12.04 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। यहां भी जांच करने पर गिरवी रखे स्टॉक में भारी कमी पाई गई। कुल मिलाकर, आलोक शारदा और अन्य आरोपियों ने दोनों वित्तीय संस्थानों को लगभग 26 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
इनपुट: IANS



