DUSU चुनाव: हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी, कहा — कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुए तो रोक देंगे गिनती
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में हुई हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर अधिकारी…
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में हुई हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर अधिकारी दोषियों के खिलाफ संतोषजनक कार्रवाई करने में नाकाम रहते हैं, तो वह वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगा सकती है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि वह 18 सितंबर को होने वाले मतदान पर कोई रोक नहीं लगा रही है। पीठ ने कहा, "हम साफ कर देना चाहते हैं कि भले ही चुनाव पर रोक नहीं लगा रहे हैं या उसे टाल नहीं रहे हैं, लेकिन अगर हम आपकी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुए, तो हम वोटों की गिनती या नतीजों की घोषणा पर रोक लगाने का कड़ा आदेश दे सकते हैं।" अदालत ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को आपराधिक समाज में नहीं बदलने दिया जा सकता।
पुलिस और यूनिवर्सिटी से मांगी गई रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली विश्वविद्यालय, दोनों को निर्देश दिया है कि वे हुड़दंग, हिंसा और चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की घटनाओं पर अब तक की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे कोई जरूरी निर्देश जारी करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार, 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे तय की गई है।
क्या हैं हिंसा के आरोप?
यह मामला वकील प्रशांत मनचंदा द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने डूसू चुनाव में लिंगदोह समिति की सिफारिशों और अन्य नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि नॉर्थ कैंपस में उम्मीदवारों, उनके समर्थकों और बाहरी लोगों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। उन्होंने हथियारों के इस्तेमाल, प्रोफेसरों और छात्रों पर हमले, तोड़-फोड़ और बाहरी लोगों के कॉलेज कैंपस में घुसने जैसी गंभीर घटनाओं का भी उल्लेख किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी इन घटनाओं को 'पूरी तरह निंदनीय' बताते हुए दोषियों को सजा दिए जाने की बात कही।
इनपुट: IANS



