प्राथमिक शिक्षक ध्यान दें: B.Ed. डिग्री वालों के लिए 6 महीने का ब्रिज कोर्स शुरू, जानें पात्रता और पूरी प्रक्रिया
प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे उन शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिनकी नियुक्ति B.Ed. डिग्री के आधार पर हुई थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को छह महीने का…
प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे उन शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिनकी नियुक्ति B.Ed. डिग्री के आधार पर हुई थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को छह महीने का 'प्राथमिक शिक्षक शिक्षा (PTE) सर्टिफिकेट (ब्रिज) कोर्स' लॉन्च किया, जिसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस कोर्स का संचालन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से किया जाएगा।
यह कोर्स विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए है, जिन्हें प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) में पढ़ाने के लिए 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच नियुक्त किया गया था। यह पहल सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2024 के एक फैसले के बाद की गई है, जिसमें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को ऐसे शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स बनाने का अधिकार दिया गया था।
कौन कर सकता है यह कोर्स?
यह पाठ्यक्रम खास तौर पर उन कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनके पास B.Ed. की डिग्री है, लेकिन प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने के लिए जरूरी डिप्लोमा (D.El.Ed.) नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, यह उन शिक्षकों को लक्षित करता है जिनकी नियुक्ति NCTE की 28 जून 2018 की अधिसूचना के तहत संरक्षित है, ताकि वे आवश्यक प्रमाणन प्राप्त कर सकें।
कोर्स की संरचना और माध्यम
यह कोर्स NCTE के दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाया गया है। इसमें छह सैद्धांतिक विषय और स्कूल-आधारित प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल है। प्रशिक्षण के तहत कम से कम 10 दिन की ऑनलाइन संपर्क कक्षाएं और 20 दिनों का स्कूल-आधारित प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।
इसकी पढ़ाई हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में होगी। हालांकि, एक बड़ी सहूलियत यह है कि शिक्षक थ्योरी की परीक्षा में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 में से किसी भी भारतीय भाषा में अपने उत्तर लिख सकते हैं।
क्या है इस पहल का लक्ष्य?
शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह कार्यक्रम शिक्षकों को बाल-केंद्रित, समावेशी और विकासात्मक रूप से उपयुक्त शिक्षण विधियों को अपनाने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को छोटे बच्चों की विभिन्न सीखने की जरूरतों को समझने और उन्हें प्रभावी ढंग से पढ़ाने के लिए जरूरी कौशल से लैस करना है, जिससे आधारभूत शिक्षा की नींव मजबूत हो सके।
इनपुट: IANS



