कोयला क्षेत्र में बड़ा कदम: सरकार ने 25 और खदानों की नीलामी शुरू की, छह के समझौते सौंपे
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयला आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोयला मंत्रालय ने कमर्शियल माइनिंग के लिए 25 नई कोयला खदानों की नीलामी का…
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयला आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोयला मंत्रालय ने कमर्शियल माइनिंग के लिए 25 नई कोयला खदानों की नीलामी का 16वां दौर शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में इस नए दौर की शुरुआत के साथ-साथ पहले सफल रहे बोलीदाताओं को छह खदानों के लिए विकास और उत्पादन समझौते भी सौंपे गए।
इन छह खदानों में तारा (संशोधित), मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II और पीकेसी का डिप साइड शामिल हैं। इनके सफल बोलीदाताओं में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड, झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड, क्यूब कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, गैलेंट इस्पात लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज लिमिटेड जैसी कंपनियाँ हैं।
नीलामी से अर्थव्यवस्था को क्या मिलेगा?
इन छह खदानों में ही लगभग 1,504 मिलियन टन का भूवैज्ञानिक भंडार मौजूद है और इनकी कुल उत्पादन क्षमता 11.62 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जब ये खदानें पूरी तरह चालू हो जाएंगी, तो इनसे सरकारी खजाने को सालाना करीब 1,984 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने का अनुमान है। इसके अलावा, ये खदानें लगभग 1,743 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश आकर्षित करेंगी और कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में 15,700 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करेंगी।
16वें दौर में क्या है खास?
नीलामी के नवीनतम 16वें दौर में देश के नौ राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल—में फैले 25 कोयला ब्लॉक शामिल किए गए हैं। इनमें से 21 खदानें पूरी तरह से खोजी जा चुकी हैं, जबकि चार आंशिक रूप से खोजी गई हैं। सरकार ने इस प्रक्रिया को निवेशकों के लिए काफी उदार बनाया है, जिसमें कोयले के अंतिम उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है, ऑटोमैटिक रूट से 100% एफडीआई की अनुमति है और कम अग्रिम भुगतान जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
'आत्मनिर्भर ऊर्जा' पर सरकार का जोर
इस अवसर पर कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोयला भारत की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का लगभग 55% और बिजली उत्पादन का 70% से अधिक हिस्सा पूरा करता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश का कोयला उत्पादन लगातार दूसरे साल 1 अरब टन के पार पहुँच गया है, जो घरेलू कोयला क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। मंत्री ने निवेशकों से इस नीलामी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया ताकि घरेलू उत्पादन बढ़ाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
इनपुट: IANS



