सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद पंजाब के चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग, अकाली दल ने राज्यपाल से की अपील
पंजाब में नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद, शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य के चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। पार्टी…
पंजाब में नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद, शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य के चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। पार्टी ने गुरुवार को इस संबंध में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला इस बात का प्रमाण है कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयुक्त ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की मदद करने के लिए प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों को नजरअंदाज किया। चीमा ने कहा, "यह पूरी तरह साबित हो गया है कि राज्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में जमीनी स्तर के लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"
चुनावों में धांधली और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
दलजीत सिंह चीमा ने अदालत द्वारा नियुक्त एक तथ्य-खोज आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसकी अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर ने की थी। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में पाया गया कि दिसंबर 2024 की नामांकन प्रक्रिया के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों के साथ मारपीट की गई, उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका गया और नाम वापस लेने के लिए उन पर दबाव डाला गया। रिपोर्ट में फर्जी मतदान जैसी घटनाओं का भी जिक्र है।
अकाली नेता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत का यह निर्णय कि पटियाला के 28, बाघापुराना के सभी 15 और धर्मकोट के 7 वार्डों में पुनर्मतदान एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में होगा, यह दर्शाता है कि अदालत को राज्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है।
पराली और किसानों का मुद्दा
इस दौरान दलजीत सिंह चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर किसानों से वादाखिलाफी का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने और पराली प्रबंधन के लिए 1,500 रुपये प्रति एकड़ की सहायता देने का वादा किया था। चीमा ने आरोप लगाया कि अब ड्रोन से निगरानी कर किसानों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि सरकार न तो पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध करा सकी है और न ही वित्तीय सहायता पर कोई अधिसूचना जारी की है।
इनपुट: IANS



