दिल्ली-NCR से UP तक फैला था फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट रैकेट, 9 गिरफ्तार, कॉलेजों में एडमिशन का खुलासा
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कॉलेजों में दाखिले के लिए फर्जी दिव्यांग (PWD) प्रमाण पत्र बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने इस…
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कॉलेजों में दाखिले के लिए फर्जी दिव्यांग (PWD) प्रमाण पत्र बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालयों के कर्मचारी भी शामिल हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरोह छात्रों से मोटी रकम लेकर उन्हें फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र मुहैया कराता था, जिसका इस्तेमाल प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए किया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 नकली विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। यह गिरोह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल का उपयोग करके छात्रों के आधार कार्ड पर उत्तर प्रदेश के फर्जी पते दर्ज करता था, ताकि वहां से प्रमाण पत्र जारी कराया जा सके।
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
इस पूरे मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब 31 अगस्त को दिल्ली पुलिस के उत्तरी जिले के स्पेशल स्टाफ को एक अहम सूचना मिली। जानकारी के अनुसार, यूपी के अलीगढ़ का रहने वाला ललित कुमार नाम का व्यक्ति पैसे लेकर जेबीटी, बीटेक और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे पाठ्यक्रमों में फर्जी PWD सर्टिफिकेट के आधार पर दाखिला करा रहा था। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर रोहित सारस्वत के नेतृत्व में एक टीम ने हरियाणा के फरीदाबाद से 36 वर्षीय ललित कुमार उर्फ आदित्य को गिरफ्तार किया। उसके पास से बदायूं, बरेली और सिद्धार्थ नगर के सरकारी अस्पतालों द्वारा जारी 16 फर्जी प्रमाण पत्र मिले।
गिरोह का नेटवर्क और कार्यप्रणाली
ललित से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोग पुलिस की गिरफ्त में आए। उसने बताया कि वह नोएडा स्थित शिक्षा सलाहकार रोशन मिश्रा और अन्य सलाहकारों के साथ मिलकर छात्रों का डेटा हासिल करता था। रोशन मिश्रा 'रुद्र कंसल्टेंसी' चलाता था और छात्रों के आधार कार्ड, फोटो और हस्ताक्षर ललित को मुहैया कराता था।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार था:
- एआई टूल से छात्रों के आधार कार्ड पर यूपी के सिद्धार्थ नगर, बदायूं, बरेली जैसे जिलों के पते डाले जाते थे।
- इन फर्जी पतों के आधार पर यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) पोर्टल पर आवेदन किया जाता था।
- इसके बाद, प्रत्येक प्रमाण पत्र के लिए 20,000 से 30,000 रुपये लेकर अलग-अलग जिलों में CMO कार्यालयों में बैठे अपने साथियों के माध्यम से उन्हें मंजूरी दिलाई जाती थी।
कौन-कौन हुआ गिरफ्तार?
ललित और रोशन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक-एक कर कई और गिरफ्तारियां कीं। इनमें बरेली CMO ऑफिस का संविदा कर्मचारी कुलदीप, विकलांगता बोर्ड के सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत सक्सेना, और शेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। इसी तरह, सिद्धार्थ नगर CMO ऑफिस के सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर जयप्रकाश शुक्ला, देवरिया CMO ऑफिस के जूनियर असिस्टेंट धीरेंद्र कुमार पांडे और कुछ अन्य बिचौलियों को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों के बीच हुए पैसों के लेन-देन के सबूत भी जुटाए हैं और मामले की आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



