पंजाब में भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची मान सरकार
पंजाब में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच को लेकर राज्य सरकार और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के बीच छिड़ी कानूनी जंग अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गई है। राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार ने…
पंजाब में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच को लेकर राज्य सरकार और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के बीच छिड़ी कानूनी जंग अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गई है। राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें CBI को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट गुरुवार, 8 अक्टूबर को पंजाब सरकार की इस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। इस सुनवाई से यह तय होगा कि हाईकोर्ट द्वारा निर्देशित CBI जांच आगे बढ़ेगी या उस पर रोक लगेगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से शुरू हुआ था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पंजाब में अधिकारियों के तबादले और तैनाती, टेंडर, लाइसेंस, मंजूरियों और विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्तियों में एक संगठित भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन का नेटवर्क काम कर रहा है। इसमें वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को प्रभावित करने का भी आरोप है।
इन्हीं आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू करने और दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
पंजाब सरकार की दलील
पंजाब सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले का पुरजोर विरोध कर रही है। सरकार ने अपनी अपील का मुख्य आधार CBI को दी गई 'सामान्य सहमति' (General Consent) को बनाया है। राज्य सरकार का कहना है कि नवंबर 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पंजाब में जांच के लिए CBI को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। इसी तर्क के आधार पर वह हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। इससे पहले राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी कहा था कि सरकार इस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत जाएगी।
इनपुट: IANS



