शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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लाहौर: 8 महीनों में यौन हिंसा के 500 से ज़्यादा मामले, महिला सुरक्षा पर गहराए सवाल

पाकिस्तान के लाहौर शहर में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में एक тревожная वृद्धि देखी गई है, जिसने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

लाहौर: 8 महीनों में यौन हिंसा के 500 से ज़्यादा मामले, महिला सुरक्षा पर गहराए सवाल
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के लाहौर शहर में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में एक тревожная वृद्धि देखी गई है, जिसने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन 'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) ने पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए खुलासा किया है कि इस साल के पहले आठ महीनों में ही शहर में बलात्कार के 498 और सामूहिक बलात्कार के 36 मामले दर्ज किए गए।

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इन आंकड़ों का मतलब है कि लाहौर में हर दिन औसतन चार से ज़्यादा यौन अपराधों की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। वीओपीएम ने इन Zahlen पर चिंता जताते हुए कहा, "ये सिर्फ कागजी आंकड़े नहीं हैं। ये बेटियां, बहनें, माताएं और पड़ोसनें हैं जिनकी जिंदगी बर्बाद हो गई है, और अक्सर उन्हीं घरों में जहां उन्हें सुरक्षित रहना चाहिए था।"

शहर के हर कोने में अपराध

पुलिस डिवीजनों के हिसाब से देखें तो लाहौर का कोई भी इलाका यौन हिंसा से अछूता नहीं है। सदर डिवीजन में बलात्कार के सबसे ज़्यादा 132 मामले सामने आए, जिसके बाद मॉडल टाउन में 98, कैंटोनमेंट में 92, इकबाल टाउन में 80, सिटी में 56 और सिविल लाइन्स में 40 मामले दर्ज किए गए। इसी तरह, सामूहिक बलात्कार की घटनाएँ भी सभी छह डिवीजनों में दर्ज की गईं, जिनमें मॉडल टाउन में 10, कैंटोनमेंट में 9, और सदर व इकबाल टाउन में छह-छह मामले शामिल हैं।

दर्ज मामलों से कहीं बड़ी है असलियत

अधिकार संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि दर्ज की गई FIR अपराधों की वास्तविक संख्या का केवल एक छोटा सा हिस्सा है। वीओपीएम के मुताबिक, "बदनामी का डर, शर्म, परिवार का दबाव, पुलिस पर अविश्वास और समाज से बहिष्कृत किए जाने का खतरा अनगिनत पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर करता है।" संगठन का मानना है कि मामलों में बढ़ोतरी का एक कारण अपराध में वृद्धि के साथ-साथ लोगों का अब आवाज़ उठाने का बढ़ता साहस भी हो सकता है।

संगठन ने अप्राकृतिक यौन संबंध (सोडोमी) के मामलों को भी शामिल करते हुए बताया कि अगर इन्हें जोड़ लिया जाए तो आठ महीनों में यौन अपराधों की कुल संख्या 1,108 तक पहुंच जाती है।

एक नैतिक और संस्थागत विफलता

वीओपीएम ने लाहौर में अजरबैजान की एक 20 वर्षीय महिला के साथ हुए कथित सामूहिक बलात्कार के मामले का भी उल्लेख किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा था। संगठन ने इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि एक "नैतिक विफलता" बताया है। उन्होंने कहा, "जब तक दोषियों को सजा मिलने की दर नहीं बढ़ती, जब तक पीड़ितों को सुरक्षा नहीं मिलती, और जब तक अपराधियों को निश्चित सजा नहीं मिलती, तब तक लाहौर एक ऐसा शहर बना रहेगा जहां न्याय का वादा तोड़ा जाता है और चुप्पी ही एकमात्र सुरक्षा है।"

इनपुट: IANS

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