टेलीग्राम पर पार्ट-टाइम जॉब का झांसा देकर लाखों की ठगी, दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से दो युवकों को दबोचा
पार्ट-टाइम नौकरी और निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर की जा रही ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस ने इस सिलसिले में राजस्थान के…
पार्ट-टाइम नौकरी और निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर की जा रही ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस ने इस सिलसिले में राजस्थान के जोधपुर से दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर बड़े साइबर ठग गिरोहों को बैंक खाते मुहैया कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे को इधर-उधर करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया जाता था।
यह कार्रवाई 9 जुलाई को दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि उससे टेलीग्राम के जरिए 2,84,100 रुपए ठग लिए गए।
कैसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम?
शिकायत के मुताबिक, पीड़ित से 9 जून को 'पायल सिंह जाट' नाम के एक टेलीग्राम यूजर ने संपर्क किया। उसे 'फूडपांडा' से जुड़े ऑनलाइन रिव्यू का काम दिया गया, जो पूरी तरह असली लग रहा था। इसका मकसद पीड़ित का भरोसा जीतना था। इसके बाद 2 जुलाई को उसकी पहचान 'गौरिका ओजस' नाम के एक अन्य यूजर से कराई गई, जिसने उसे एक निवेश योजना में पैसे लगाने के लिए राजी कर लिया, जिसमें बहुत ज़्यादा रिटर्न का वादा किया गया था।
पीड़ित ने ठगों के दावों पर यकीन कर लिया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के अपने खातों से आरोपियों द्वारा बताए गए कई बैंक खातों में कुल 2,84,100 रुपए ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस की जांच और गिरफ्तारी
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए पाया कि ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा (1,00,000 रुपए) जोधपुर के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में दिनेश नामक व्यक्ति के खाते में जमा हुआ था।
इस खाते से जोधपुर और अजमेर के एटीएम से पैसे निकाले गए थे। तकनीकी निगरानी और बैंक रिकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने 31 जुलाई को जोधपुर में छापा मारकर 21 वर्षीय दिनेश को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ के बाद, उसके 20 वर्षीय साथी विकास सियाग को भी जोधपुर से ही पकड़ लिया गया।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किया है। इन उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में इस्तेमाल हुआ बैंक खाता साइबर अपराध की पांच अन्य शिकायतों से भी जुड़ा हुआ था। फिलहाल, दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
इनपुट: IANS



