शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तानी दूतावास को गोपनीय सैन्य दस्तावेज़ भेजने के आरोपी को हाईकोर्ट से नहीं मिली ज़मानत

गोपनीय सैन्य दस्तावेज़ पाकिस्तान तक पहुँचाने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हबीब उर रहमान को दिल्ली उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायालय ने उनकी ज़मान…

पाकिस्तानी दूतावास को गोपनीय सैन्य दस्तावेज़ भेजने के आरोपी को हाईकोर्ट से नहीं मिली ज़मानत
(फोटो: IANS)

गोपनीय सैन्य दस्तावेज़ पाकिस्तान तक पहुँचाने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हबीब उर रहमान को दिल्ली उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायालय ने उनकी ज़मानत याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दी कि प्रथम दृष्टया सबूत उन्हें इस अपराध से जोड़ते हैं। अदालत ने माना कि लंबे समय से हिरासत में होने और खराब स्वास्थ्य के बावजूद, आरोपों की प्रकृति को देखते हुए इस स्तर पर उनकी रिहाई उचित नहीं है।

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न्यायमूर्ति संजीव नरूला की एकल-न्यायाधीश पीठ ने 25 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू शामिल हैं, जिनकी गहन जाँच आवश्यक है। पीठ ने टिप्पणी की, “अपराध की गंभीरता एक महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदु है, लेकिन यह न्यायालय को मामले का तथ्यों के आधार पर आकलन करने के कर्तव्य से मुक्त नहीं करती है।”

क्या हैं हबीब उर रहमान पर आरोप?

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, हबीब उर रहमान को 14 जुलाई, 2021 को क्राइम ब्रांच ने गिरफ़्तार किया था। उन पर सैन्य प्रशिक्षण, सशस्त्र बल विशेष अभियान प्रभाग (AFSOD) के संचालन और खुफिया जानकारी से जुड़े गोपनीय दस्तावेज़ रखने का आरोप है। क्राइम ब्रांच का दावा है कि रहमान ने इन दस्तावेज़ों को पाकिस्तान उच्चायोग के एक अधिकारी राणा मोहम्मद कासिम जिया तक पहुँचाया था। इस मामले में सेना के नायक क्लर्क परमजीत कुमार भी सह-आरोपी हैं, और रहमान पर दोनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है। सेना के अधिकारियों ने इन दस्तावेज़ों को असली, गोपनीय और संवेदनशील बताया है।

रहमान के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3 और 9 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आपराधिक साजिश, चोरी और सबूत नष्ट करने जैसे कई मामले दर्ज किए गए हैं।

ज़मानत के लिए क्या दलीलें दी गईं?

रहमान ने तीन साल और चार महीने से अधिक के कारावास, मुकदमे में देरी और अपनी खराब स्वास्थ्य स्थिति को ज़मानत का आधार बनाया था। उनके वकील ने तर्क दिया कि अप्रैल 2024 से 6 फरवरी 2026 तक अंतरिम ज़मानत के दौरान उन्होंने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। वकील ने यह भी कहा कि सबूत ज़्यादातर दस्तावेज़ी हैं और मुक़दमा जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है, इसलिए हिरासत में रखना दंडात्मक है।

अदालत ने स्वास्थ्य और हिरासत पर क्या कहा?

अदालत ने माना कि रहमान की हिरासत की अवधि "काफी लंबी है", लेकिन यह भी कहा कि इस स्तर पर यह प्रथम दृष्टया सबूतों से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, रहमान व्हीलचेयर पर निर्भर हैं और उन्हें आघातजन्य पक्षाघात समेत कई गंभीर बीमारियाँ हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि उनका इलाज जेल में नहीं हो सकता।

ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई में तेज़ी लाने का निर्देश दिया। साथ ही, जेल अधीक्षक को रहमान का उचित इलाज सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल में इलाज कराना भी शामिल है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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