शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
देश

शपथ लेते ही विवादों में केरल के नए राज्यपाल, राजभवन में मांसाहार पर रोक के निर्देश पर कांग्रेस का तीखा हमला

केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार को जैसे ही पद संभाला, एक नया विवाद खड़ा हो गया। शपथ ग्रहण के महज एक घंटे के भीतर ही राजभवन की रसोई में मांस और मछली न पकाने के कथित निर्देश को लेकर…

शपथ लेते ही विवादों में केरल के नए राज्यपाल, राजभवन में मांसाहार पर रोक के निर्देश पर कांग्रेस का तीखा हमला
(फोटो: IANS)

केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार को जैसे ही पद संभाला, एक नया विवाद खड़ा हो गया। शपथ ग्रहण के महज एक घंटे के भीतर ही राजभवन की रसोई में मांस और मछली न पकाने के कथित निर्देश को लेकर कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इसे राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं और खाद्य स्वतंत्रता पर अतिक्रमण बताया है।

विज्ञापन

समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस निर्देश की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, "जिन्होंने वोट छीने और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जड़ों पर प्रहार किया, वे अब खाद्य स्वतंत्रता भी छीनने की तैयारी कर रहे हैं।" वेणुगोपाल ने चेतावनी दी कि राज्यपाल ने केरल की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समझे बिना अपनी हद पार कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार को ओम प्रकाश माथुर ने केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। इससे पहले वह सिक्किम के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने उन्हें मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन, मंत्रियों और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपस्थिति में शपथ दिलाई। हालांकि, इस समारोह में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन मौजूद नहीं थे। शपथ के तुरंत बाद ही राजभवन की रसोई को लेकर दिए गए आहार संबंधी निर्देश पर विवाद शुरू हो गया।

कांग्रेस ने क्यों किया विरोध?

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि केरल की खान-पान की संस्कृति बहुत विविध है, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने तर्क दिया कि एक तटीय राज्य होने के नाते, केरल में मछली और अन्य मांसाहारी भोजन के सेवन की एक लंबी परंपरा रही है। वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया, "मलयाली लोगों की खान-पान की आदतों को प्रतिबंधित करने या उन्हें यह बताने का कोई भी प्रयास कि उन्हें अब से क्या खाना चाहिए, स्वीकार्य नहीं है।"

उन्होंने कहा कि राज्यपाल को अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार शाकाहारी भोजन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन राजभवन की रसोई को अपनी पसंद के हिसाब से चलाना अस्वीकार्य है, क्योंकि यह वहां के कर्मचारियों को भी भोजन परोसती है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह निर्देश संघ परिवार के "असंवैधानिक हितों" की निरंतरता है और केरल में "भगवा एजेंडा" लागू करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा, “खान-पान की स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। केरल के राज्यपाल को इस स्वतंत्रता को सीमित करने वाले किसी भी कदम से पीछे हटना चाहिए।"

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →