दिल्ली: सरकारी स्कूल की किताबों की छपाई में 40% कमीशनखोरी का आरोप, AAP ने सरकार को घेरा
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकारी स्कूलों के लिए छापी गई मुफ़्त किताबों में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली किताबों की छपाई में मानकों से…
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकारी स्कूलों के लिए छापी गई मुफ़्त किताबों में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली किताबों की छपाई में मानकों से समझौता किया गया और घटिया कागज़ का इस्तेमाल कर लगभग 40 प्रतिशत कमीशनखोरी की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मामले पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जवाब मांगा है।
सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने टेंडर में तो NCERT की किताबों के मानक का ज़िक्र किया, लेकिन छपाई में इस्तेमाल हुआ कागज़ बेहद खराब गुणवत्ता का है। उन्होंने कहा कि निविदा (टेंडर) के मुताबिक, किताबों के लिए ए-4 आकार और 80 जीएसएम (GSM) गुणवत्ता वाले कागज का इस्तेमाल होना था, लेकिन जो किताबें छपकर आई हैं, उनमें कथित तौर पर 60 से 65 जीएसएम का कागज़ लगा है।
गुणवत्ता में अंतर और लागत पर सवाल
भारद्वाज ने कक्षा आठ की 'मल्हार' पुस्तक का उदाहरण देते हुए बाज़ार में उपलब्ध NCERT की किताब और सरकार द्वारा छपवाई गई किताब की तुलना की। उन्होंने दावा किया, “सरकारी किताब का कागज़ पतला और धूसर है, जबकि बाज़ार वाली किताब बेहतर गुणवत्ता की है।” AAP नेता के अनुसार, कागज़ की गुणवत्ता और आकार के इस फ़र्क से किताब की लागत में कम से कम 40 प्रतिशत का अंतर आता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह 40 प्रतिशत कमीशन किसकी जेब में गया।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि सरकारी किताब में अक्षर इतने छोटे छापे गए हैं कि बच्चों को पढ़ने में मुश्किल हो सकती है। इसके अलावा, भारद्वाज ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि किताब के पहले पन्ने पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की तस्वीर छापी गई है।
शिक्षा सत्र आधा बीता, अब तक नहीं मिलीं किताबें
भारद्वाज ने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक सत्र का आधा समय बीत जाने के बाद भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि निजी स्कूलों को बढ़ावा देने की है। उन्होंने कहा, “पिछले साल भी निजी स्कूलों की फीस बढ़ी थी और इस साल भी बढ़ाई गई है।” भारद्वाज के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी के कारण अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने पर मजबूर हो सकते हैं।
AAP नेता ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए दवाओं, साइकिलों, चावल और दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में भी कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख किया और कहा कि अब किताबों की छपाई में भी वही हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
इनपुट: IANS



