सोमवार, 7 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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जंतर-मंतर पर मारपीट: इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई

जंतर-मंतर पर एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी हिरासत को गैर-कानूनी बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाचार…

जंतर-मंतर पर मारपीट: इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई
(फोटो: IANS)

जंतर-मंतर पर एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी हिरासत को गैर-कानूनी बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हाई कोर्ट भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई के लिए सहमत हो गया है।

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भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के समक्ष यह मामला उठाते हुए दलील दी कि उनके मुवक्किल पिछले तीन दिनों से अवैध हिरासत में हैं। याचिका में भारद्वाज को तुरंत रिहा करने की मांग की गई है। यह याचिका दिल्ली की एक अदालत द्वारा भारद्वाज को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के ठीक एक दिन बाद दायर की गई है।

गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया

स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों द्वारा दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने के कुछ घंटों बाद हुई। शनिवार को उन्हें कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद, ड्यूटी मजिस्ट्रेट अंजलि सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि दिल्ली पुलिस ने 14 दिनों की हिरासत की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने सीजेपी के नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में कहा था कि कुमार को 'मामूली' चोटें आईं, जो स्टील के ब्रेसलेट से लगी थीं। हालांकि, बाद में पुलिस ने दर्ज FIR में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ दीं।

इसके अलावा, नाबालिग एक्टिविस्ट की शिकायत पर भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत भी एक अलग FIR दर्ज की गई है। एक्टिविस्ट ने उन पर ऑनलाइन दुष्कर्म की धमकी देने और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधान भी लागू किए गए हैं।

वकील और राजनीतिक संपर्क के आरोप

भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि रिमांड हासिल करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "पुलिस ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक बिल्कुल अलग तय एससी/एसटी कोर्ट के सामने पेश किया और एक दिन की पुलिस रिमांड हासिल कर ली।" यह विवाद एक कथित वायरल वीडियो के बाद और गहरा गया, जिसमें भारद्वाज ने मारपीट की बात स्वीकारते हुए अपने 'राजनीतिक संपर्कों' की वजह से बच निकलने का दावा किया था। इस वीडियो में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम भी लिया गया था, जिन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि भारद्वाज ने उनके नाम का 'गलत इस्तेमाल' किया है और उन्होंने उसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है।

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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