देश के पावर प्लांट्स को कोयले की सप्लाई बढ़ी, चार दिन में 74 रैक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
देश के बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट्स) को होने वाली कोयले की आपूर्ति में एक बड़ा सुधार देखा गया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने बताया है कि कोयले की ढुलाई के लिए इस्तेमाल…
देश के बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट्स) को होने वाली कोयले की आपूर्ति में एक बड़ा सुधार देखा गया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने बताया है कि कोयले की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाली रेल रैक की संख्या में सिर्फ़ चार दिनों के भीतर प्रतिदिन 74 रैक की बढ़ोतरी हुई है। यह सुधार बिजली क्षेत्र की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए किए जा रहे समन्वित प्रयासों का नतीजा है।
आंकड़ों के मुताबिक, 3 सितंबर को पावर सेक्टर के लिए 370 रैक कोयला भेजा जा रहा था, जो 6 सितंबर तक बढ़कर 444 रैक प्रतिदिन के स्तर पर पहुँच गया। कोयला मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि पिछले चार दिनों से कोयले की लोडिंग में लगातार वृद्धि का रुझान बना हुआ है।
किस कंपनी ने कितनी बढ़ाई आपूर्ति?
इस सुधार में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) और निजी कोयला खदानों ने मिलकर अहम भूमिका निभाई है। 6 सितंबर को लगभग सभी प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनियों ने अपनी लोडिंग क्षमता में सुधार दर्ज किया।
- महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL): सबसे ज़्यादा 12 रैक की वृद्धि के साथ 111 रैक प्रतिदिन पर पहुँची।
- कैप्टिव कोल ब्लॉक: 6 रैक की बढ़ोतरी के साथ 72 रैक प्रतिदिन पर।
- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL): 8 रैक की वृद्धि के साथ 25 रैक प्रतिदिन तक पहुँची।
- नॉर्दर्न कोलफील्ड्स (NCL): 3 रैक बढ़कर 35 रैक प्रतिदिन।
- प्राइवेट वॉशरी: 3 रैक बढ़कर 42 रैक प्रतिदिन।
- सेंट्रल कोलफील्ड्स (CCL) और SECL: क्रमशः 2 और 1 रैक की वृद्धि के साथ 36 और 46 रैक प्रतिदिन तक पहुँचे।
वहीं, ईस्टर्न कोलफील्ड्स (ECL) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स (WCL) ने क्रमशः 23 और 29 रैक प्रतिदिन का अपना पिछला स्तर बनाए रखा। इन सभी प्रयासों से CIL साइडिंग्स से कुल लोडिंग एक दिन में 26 रैक बढ़कर 305 रैक प्रतिदिन हो गई।
'क्रिटिकल' प्लांट्स पर विशेष ध्यान
कोयला मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन ताप विद्युत संयंत्रों पर विशेष रूप से नज़र रखी जा रही है, जहाँ कोयले का भंडार निर्धारित स्तर के 25% से भी कम है। इन "क्रिटिकल" श्रेणी के प्लांट्स की स्थिति सुधारने के लिए अतिरिक्त कोयला भेजने सहित कई कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में बिजली उत्पादन पर कोयले की कमी का कोई असर न पड़े।
इनपुट: IANS



