सोमवार, 31 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत-उज्बेकिस्तान साझेदारी: मध्य और दक्षिण एशिया के बीच बन सकता है एक अहम पुल - उज्बेक मीडिया

उज्बेकिस्तान की सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों की साझेदारी को मध्य और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले एक प्रमुख पुल के रूप में स्थापि…

भारत-उज्बेकिस्तान साझेदारी: मध्य और दक्षिण एशिया के बीच बन सकता है एक अहम पुल - उज्बेक मीडिया
(फोटो: IANS)

उज्बेकिस्तान की सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों की साझेदारी को मध्य और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले एक प्रमुख पुल के रूप में स्थापित कर सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से ठीक पहले आई है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने वाले एक महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।

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उज्बेकिस्तान नेशनल न्यूज एजेंसी (UzA) की रिपोर्ट में इस मजबूत होते रिश्ते का श्रेय दोनों देशों के नेताओं की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, आपसी मतभेदों की कमी, ऐतिहासिक निकटता और एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाओं को दिया गया है। रिपोर्ट कहती है, "दूसरे शब्दों में, संबंध संस्थागत मजबूती, विस्तारित आर्थिक सामग्री और संयुक्त मूल्य निर्माण की ओर क्रमिक बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।"

साझा वैश्विक दृष्टिकोण और रणनीतिक स्वायत्तता

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि दोनों देश कई वैश्विक मुद्दों पर एक जैसा नजरिया रखते हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को मजबूत करना, आतंकवाद का मुकाबला करना, अफगानिस्तान में स्थिरता लाना और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, "दोनों देश रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाते हैं और गुटबाजी की सोच से मुक्त सहयोग की वकालत करते हैं। यह निकटता उनके संबंधों को बाहरी परिस्थितियों के प्रति लचीला बनाती है।"

आर्थिक सहयोग और संसाधन साझेदारी

रिपोर्ट में आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया है। भारत 'नॉर्थ-साउथ' व्यापार कॉरिडोर के लिए प्रतिबद्ध है और इसके प्रमुख हिस्से चाबहार बंदरगाह के विकास में निवेश जारी रखने को तैयार है। वहीं, भारत अपने बढ़ते उद्योगों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए तांबा, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के स्रोत बढ़ाना चाहता है।

इस संदर्भ में, उज्बेकिस्तान एक महत्वपूर्ण भागीदार हो सकता है, जिसके पास हरित अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी 32 प्रकार के खनिजों का भंडार है। रिपोर्ट के अनुसार, साझा हित सिर्फ कच्चे माल की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संयुक्त वैल्यू चेन बनाने में है, जिसमें भूवैज्ञानिक खोज से लेकर हरित धातुओं का प्रसंस्करण और सौर ऊर्जा के लिए घटकों का उत्पादन शामिल है। इस मॉडल से "भारत को अधिक स्थिर संसाधन आधार मिलेगा, जबकि उज्बेकिस्तान को पूंजी, प्रौद्योगिकी और स्थिर मांग मिलेगी।"

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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