बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

रीवा परमाणु ऊर्जा परियोजना: कांग्रेस ने ग्राम सभा की आपत्ति के बावजूद NOC जारी होने पर उठाए गंभीर सवाल

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्थानीय ग्राम सभा के विरोध के बावजूद इस परियोजना के लिए प्रारंभिक…

रीवा परमाणु ऊर्जा परियोजना: कांग्रेस ने ग्राम सभा की आपत्ति के बावजूद NOC जारी होने पर उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्थानीय ग्राम सभा के विरोध के बावजूद इस परियोजना के लिए प्रारंभिक ड्रिलिंग की मंजूरी दे दी गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया और सरकार से जवाबदेही की मांग की।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक दिन पहले प्रस्तावित परियोजना स्थल रोजहौही-सरई कला क्षेत्र का दौरा किया था। वहां उन्होंने प्रदर्शन कर रहे आदिवासी और अन्य ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी चिंताएं समझीं। सिंघार ने सवाल उठाया, "जब ग्राम सभा ने स्पष्ट रूप से सहमति देने से इनकार कर दिया था, तो फिर 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (एनओसी) किस आधार पर जारी किया गया? सरकार को इसकी परिस्थितियों की जानकारी देनी चाहिए और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।"

एनओसी पर विवाद और तारीखों का पेंच

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 3 सितंबर को हुई ग्राम सभा में ड्रिलिंग की अनुमति देने से सर्वसम्मति से इनकार कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि इस फैसले की सूचना ग्राम पंचायत द्वारा 5 सितंबर को एक पत्र के जरिए जिला कलेक्टर को भी दी गई थी। इसके बावजूद, 23 सितंबर को एक एनओसी जारी कर दिया गया, जिसमें 4 सितंबर के एक कथित सहमति पत्र का जिक्र है, जिसे पार्टी फर्जी बता रही है।

सिंघार के मुताबिक, सरपंच कोमल संजय सिंह ने 8 अक्टूबर को संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर से मिलकर इस कथित सहमति पत्र की सत्यता की जांच करने और जारी की गई एनओसी को रद्द करने की मांग भी की थी।

स्थानीय लोगों की चिंताएं और सरकार से सवाल

प्रस्तावित परियोजना में 220-220 मेगावाट की दो परमाणु ऊर्जा इकाइयों की स्थापना होनी है। स्थानीय निवासी, जिनमें आदिवासी परिवार, छोटे किसान और खेतिहर मजदूर शामिल हैं, सुरक्षा, पानी की उपलब्धता, कृषि पर असर और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर इसका विरोध कर रहे हैं।

इस मामले में सिंघार ने सरकार से कई अहम जानकारियां मांगी हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या परियोजना के लिए जरूरी पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), भूकंपीय जोखिम अध्ययन और जल उपलब्धता का आकलन पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने आपदा प्रबंधन की तैयारियों, रिएक्टरों की जगह और सुरक्षा क्षेत्र के दायरे में आने वाले गांवों व परिवारों की संख्या पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

सिंघार ने कहा, "सरकार को बताना चाहिए कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और आदिवासी परिवारों तथा किसानों के हितों की रक्षा किस प्रकार होगी।" उन्होंने प्रदर्शन के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मृत्यु का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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